सहारनपुर। कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले के बाद औषधि प्रशासन विभाग मेडिकल स्टोरों की जियो टैगिंग में जुटा है। नए मेडिकल स्टोर का लाइसेंस तभी जारी होगा, जब उसकी जियो टैगिंग होगी। इसके साथ ही स्टॉक स्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग भी रखनी होगी।
प्रदेश में पिछले दिनों कोडीनयुक्त कफ सिरप के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ था। इसमें सहारनपुर से लखनऊ एसटीएफ ने 12 नवंबर 2025 को दो सगे भाइयों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद लखनऊ में आलमबाग से भी सहारनपुर के दो युवक पकड़े गए थे। ईडी ने भी छापा मारकर विभोर राणा और उसके भाई विशाल सिंह के घर पर दस्तावेज खंगाले थे। इसके बाद शासन ने दवा लाइसेंस प्रक्रिया में बड़ी कमियों को पहचान लिया था। जांच में सामने आया कि कई लाइसेंस ऐसे स्थानों के नाम पर जारी थे जो धरातल पर मौजूद नहीं थे। इस कारण लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जा रही है।
दवाओं की बिक्री के अभिलेखों के रखरखाव पर विशेष नजर रखी जाएगी। सभी मेडिकल स्टोर और गोदामों की गूगल मैपिंग के जरिए सटीक लोकेशन दर्ज की जाएगी। दुकान या गोदाम के मुख्य द्वार पर खड़े होकर औषधि निरीक्षक खीचेंगे, जिसमें उस स्थान के अक्षांश और देशांतर दर्ज होंगे। निरीक्षण के दौरान मानकों का कड़ाई से पालन होगा। वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसमें स्टोर का साइन बोर्ड, फ्रिज की व्यवस्था और आसपास की दुकानें स्पष्ट दिखनी चाहिए।
अब जियो टैगिंग के साथ ही ड्रग लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। यह व्यवस्था एक जनवरी से लागू की गई है। समय-समय पर दवाओं का स्टॉक रजिस्टर चेक होगा, ताकि कोई हेराफेरी न कर सके।
- राघवेंद्र सिंह, औषधि निरीक्षक