संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। अमेरिकी संसद के 100 फीसदी टैरिफ बिल को पास करने के बाद से जिले के निर्यातकों में खासी हलचल है। यदि अमेरिका रूस से तेल खरीदने के चलते टैरिफ लगाता है तो निर्यातकों की मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी। जिले का निर्यात पहले से ही पिछले पांच वर्षों में घटकर करीबन 400 करोड़ रुपये रह गया है।
जिले से बड़ी संख्या में वुडन हैंडीक्राफ्ट उत्पादों का निर्यात बाहरी देशों को होता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा अमेरिका का है। निर्यातकों और कारोबारियों के मुताबिक टैरिफ वॉर से पहले जिले से अमेरिका को भेजे जाने वाले निर्यात का हिस्सा 60 से 65 फीसदी था। पिछले वर्ष अप्रैल में टैरिफ वॉर शुरू होने के बाद से इसमें कमी आई है। वर्तमान में अमेरिका को निर्यात घटकर 40 फीसदी तक ही रह गया है। टैरिफ के बीच खरीदार भी नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं। ऐसे में जिले के निर्यातक नया बाजार खोज रहे हैं।
पहले रूस-यूक्रेन युद्ध फिर बाद में टैरिफ के वार ने जिले के निर्यात को खासा नुकसान पहुंचाया है। कोरोना से पहले जिले से करीब 1200 करोड़ रुपये का निर्यात बाहरी मुल्कों को होता था। हर साल इसमें गिरावट आ रही है। ईरान युद्ध से हालात और भी खराब हुए हैं। अब टैरिफ के नए वार से जिले के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। हालांकि निर्यातकों का मानना है कि भारत पर फिलहाल टैरिफ नहीं लगेगा।
- बोले निर्यातक और उद्यमी
- आईआईए के सहारनपुर चैप्टर चेयरमैन सतीश कुमार अरोड़ा बताते हैं कि भारत सरकार भी कूटनीतिक रूप से अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है। यदि टैरिफ लागू होता है तो जिले के निर्यात पर बड़ा असर पड़ेगा। पश्चिम एशिया में भी हालात ठीक नहीं है।
- उद्यमी और निर्यातक आरिफ खान बताते हैं कि वुडन हैंडीक्राफ्ट पर वैश्विक परिस्थितियों का सबसे बुरा प्रभाव पड़ा है। अमेरिका के बाद गल्फ कंट्रीज में अधिक उत्पाद जाते थे। युद्ध के चलते वहां से भी ऑर्डर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में टैरिफ न ही लगे तो बेहतर है।
निर्यातक व उद्यमी आरिफ खान। कारोबार की खबर।