सहारनपुर। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत प्रस्तावित हैबिटेट सेंटर निर्माण कार्य में 7.44 करोड़ रुपये के भुगतान विवाद गहरा गया है। प्रोपराइटर ने जैन गृह उद्योग जेवी और आरएंडबी इंफ्रा प्रोजेक्ट के निदेशकों पर 1.50 करोड़ रुपये बकाया और फर्जी बिलिंग का आरोप लगाया है। इस मामले में कोर्ट के आदेश पर थाना सदर बाजार पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मुजफ्फरनगर में सुभाष नगर नई बस्ती निवासी एवं आकाश एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर आकाश शर्मा ने तहरीर देकर बताया कि वर्ष 2022 में यूपी राजकीय निर्माण इकाई मेरठ द्वारा हैबिटेट सेंटर निर्माण का टेंडर जैन गृह उद्योग जेवी को दिया गया था, जिसमें 51 प्रतिशत हिस्सेदारी आरएंडबी इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड व 49 प्रतिशत जैन गृह उद्योग प्राइवेट लिमिटेड की बताई गई है। आरोप है कि निदेशक संजय जैन, मुकेश जैन और रतन सिंह राठौर ने मिलकर बैचिंग प्लांट संचालन और सरिया स्टील व अन्य निर्माण सामग्री आपूर्ति का ठेका दिया।
आकाश शर्मा का कहना है कि 23 जून 2023 को 900 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर की दर से प्लांट संचालन का अनुबंध हुआ था। इसके साथ ही प्लांट बंद रहने की स्थिति में 7.50 लाख रुपये प्रतिमाह भुगतान तय हुआ था। उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 2024 तक लगभग एक करोड़ रुपये का प्लांट कार्य और 5.94 करोड़ रुपये की सामग्री सप्लाई की गई, लेकिन 1.50 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया। यह भी आरोप लगाया कि जीएसटी का लाभ उठाकर सरकार को जमा नहीं किया गया और फर्जी व कूटरचित बिलों के आधार पर विभाग से भुगतान लिया गया।
इसके साथ ही बिना अनुमति कार्य को दूसरी कंपनी को दिया गया। बकाया राशि मांगने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। थाना सदर बाजार में शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसएसपी से भी शिकायत भेजी। पीड़ित ने कोर्ट में शरण ली। अब कोर्ट के आदेश पर थाना सदर बाजार पुलिस ने रतन सिंह राठौर, मुकेश जैन और संजय जैन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के लिए उप निरीक्षक विपिन कुमार को नामित किया है।