सहारनपुर में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति में करोड़ों के खेल से संबंधित समाचार अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद हड़कंप मच गया। शुक्रवार को क्षेत्र के कालेजों में चल रही परीक्षाओें के दौरान पर्यवेक्षकों और कालेज स्टाफ द्वारा की गई जांच में बड़ा घालमेल सामने आया।
दून कालेज में तो तीन परीक्षार्थियों को पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया गया। जबकि एक दूसरे कालेज में भी तीन पेपर छोड़ने के बाद चौथा पेपर देने पहुंचे 15 संदिग्ध परीक्षार्थियों की जांच के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी।
शुक्रवार को अमर उजाला में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति में करोड़ों का घोटाला, शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई तो कालेज संचालकों में हड़कंप मच गया। वर्तमान में पॉलीटेक्निक की परीक्षाएं चल रही हैं।
इन परीक्षाओं के दौरान जब पर्यवेक्षकों और कक्ष निरीक्षकों ने गहनता से जांच की तो चौंकाने वाली बातें सामने आई। बिहारीगढ़ के दून कालेज में स्वामी विवेकानंद पॉलीटेक्निक मांडुवाला का सेंटर लगा हुआ है। यहां के तीन परीक्षार्थी ऐसे थे जिनके प्रवेश पत्र पर किसी दूसरे का फोटो लगा था। ये इन प्रवेशपत्रों अब तक पांच पेपर दे भी चुके थे।
छठे पेपर में इन्हें रोक दिया गया और कालेज स्टाफ ने थाना बिहारीगढ़ पुलिस को बुला कर उसे इन्हें सौंप दिया गया। जहां देर शाम तक ये पुलिस हिरासत में बैठे रहे। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
विवेकानंद कालेज से छात्रों को छुड़वाने थाने पहुंचे सुखबीर शर्मा ने बताया कि बोर्ड के स्तर से गलती हुई है। तीनों छात्र उनके कॉलेज के हैं। उधर एसओ बिहारीगढ़ प्रेमप्रकाश शर्मा ने बताया कि दून कालेज की तरफ से छात्रों को पुलिस को सौंपा गया था जिन्हें बाद में जांच में सही पाए जाने पर दून कालेज के अनुरोध पर छोड़ दिया गया।
दूसरे मामले में स्टेलियन कालेज में जनहित इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी का सेंटर लगा है। यहां भी पर्यवेक्षक सुनील कुमार ने जब जांच की तो इस जनहित कालेज के 15 छात्र ऐसे मिले जो पहले तीन पेपर छोड़ चुके थे और चौथा पेपर देने आए थे।
जबकि तीन पेपर में फेल होने पर ईयर बैक लग जाती है। ऐसे में इनका चौथा पेपर देने का कोई औचित्य नहीं बैठता फिर भी इनके पेपर देने आने को लेकर छात्रवृत्ति से जुड़ा खेल माना जा रहा है।
बताया जाता है कि पूछताछ में ये छात्र अपने कालेज का नाम तक नहीं बता पाए। इस पर फतेहपुर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और वीडियोग्राफी करके वापिस आ गई। हालांकि प्रवेश पत्र पर इनके ही फोटो होने के कारण इन्हें परीक्षा में बैठने दिया गया।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि समाज कल्याण विभाग के निदेशक महेंद्र प्रताप सिंह की अगुवाई वाली टीम की जांच रिपोर्ट में जनहित कालेज भी छात्रवृत्ति फर्जीवाड़े में शामिल मिला है।