सहारनपुर। धान की सीधी बुवाई किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। इस विधि में धान का उत्पादन भी परम्परागत तरीके लगाए गए धान के बराबर ही होता है। पानी और श्रम कम लगने से फसल की लागत में कमी आती है। जिले में इस बार 40 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की सीधी बुवाई करने का लक्ष्य है।
धान की सीधी बुवाई पानी और श्रमिकों की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। इस विधि में 50 फीसदी पानी की बचत हो जाती है। इसमें न तो धान की नर्सरी तैयार की जाती है और न ही रोपाई होती है। इसमें सीधे धान की बुवाई सीड ड्रिल या सुपर सीडर के माध्यम की जाती है। इसे लगाने की लागत और पानी की खपत में कमी आती है। इसमें खेत को अच्छी तरीके से तैयार कर उचित नमी होने पर सीड ड्रिल के माध्यम से बीज की सीधी बुवाई होती है। धान की सीधी बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय 25 मई से लेकर 20 जून तक है। बीज की गहराई दो सेंटीमीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। उर्वरक भी बुवाई के समय ही दिए जाते हैं। सीधी बुवाई में सबसे अधिक समस्या खरपतवार नियंत्रण की होती है। इसलिए किसान बुवाई के तुरंत बाद खरपतवारनाशी रसायन का स्प्रे करना चाहिए। अन्य सभी कार्य सामान्य विधि के अनुसार ही होते हैं।
पीवी 1692 और 1509 प्रजातियों के लिए उपयुक्त विधि
धान की सीधी बुवाई विधि 120 से 125 दिन की अवधि में पकने वाली पीवी 1692, पीवी 1509 एवं पीवी 1847 प्रजाति के लिए बहुत ही उपयुक्त है। बुवाई से पहले बीज को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन एवं बावस्टीन से उपचारित किया जाए। धान के बीज को 10 घंटे पानी में भिगोकर रखा जाए, उसके बाद सुखाकर बुवाई की जाए। सीडड्रिल या सुपरसीडर के माध्यम से बुवाई करने पर धान की महीन प्रजातियों का 30 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की दर से लगता है।
वर्जन
धान की सीधी बुवाई का गत वर्ष सांपला बेगमपुर में 50 बीघा में ट्रायल किया गया था, जो सफल रहा। इस बार विभाग का लक्ष्य 40 हेक्टेयर में इस विधि से धान की बुवाई करना है। इसके लिए किसानों को जागरुक किया जा रहा है।
- डॉ. राकेश कुमार, उप निदेशक कृषि।