सहारनपुर में कम लागत में बढ़िया आमदनी के चलते जिले के किसानों को ढिंगरी मशरूम की खेती भा रही है। फरवरी-मार्च पैदा होने वाली यह मशरूम 40-45 दिन में अपना फसल चक्र पूरा कर लेती है।
इस प्रजाति की मशरूम का सुखाकर अधिक समय तक भंडारण भी किया जा सकता है। ढिंगरी प्रजाति की मशरूम बड़ी ही खुशबूदार, स्वादिष्ट और पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है।
इसका रूप सीप के आकार का होने के चलते इसे अस्टर मशरूम के नाम से भी जाना जाता है। इसके बढ़िया उत्पादन के लिए 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान और 80 से 90 प्रतिशत आर्द्रता होनी चाहिए।
मशरूम की यह प्रजाति 40 से 45 दिन में एक फसल चक्र पूरा कर लेती है। इस प्रकार पूरे वर्ष में इसकी 5 से 6 फसलें जी जा सकती है। किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए गेहूं का साफ भूसा, फार्मलीन, कार्बेडाजिंम , पॉली बैग, कमरा और मशरूम स्पान बीज की जरूरत होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के मशरूम वैैैज्ञानिक डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि 10 क्विंटल भूसे में ढिंगरी मशरूम की उत्पादन लागत करीब 25 हजार रुपये आती है। इसमें से करीब 48 हजार रुपये की मशरूम हो सकती है यानि किसान 40 से 45 समयावधि वाली इस फसल से लगभग 23 हजार रुपये की शुद्घ आय प्राप्त कर सकते हैं।