सहारनपुर में नगर क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए कुल 92 ट्यूबवेल लगे हैं। इनमें केवल 14 पर ही जनरेटर की व्यवस्था है। हैरत की बात यह है कि इन 14 जनरेटर में नगर निगम आठ से दस लाख रुपये के डीजल की खपत प्रत्येक महीने दिखा रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जब ज्यादातर जनरेटर चल ही नहीं रहे हैं तो दस लाख रुपये का तेल जा कहां जा रहा है?
अमर उजाला की टीम मंगलवार को नगर क्षेत्र के कई ट्यूबवेल पर जाकर हकीकत जानने का प्रयास किया। कुछ जनरेटर वाले ट्यूबवेल पर जनरेटर के चलने का रजिस्टर भी चेक किया गया। इसी महीने देखा जाए तो करीब 15 दिन में मुश्किल से चार दिन ही कुछ घंटे जनरेटर चला दर्शाया गया है।
कर्मचारियों ने बताया कि जनरेटर केवल सुबह के समय चलाने के निर्देश हैं। यदि सुबह पांच बजे से दस बजे तक बिजली आती रहे तो फिर जनरेटर नहीं चलाया जाता। यदि इस अंतराल में बिजली चली जाए तो जनरेटर चलाना पड़ता है। ताकि जनता को सुबह के समय भोजन बनाने, नहाने और अन्य इस्तेमाल में पानी भरपूर मात्रा में मिले।
बताया कि कई बार ऐसा हुआ है कि महीने में रोजाना सुबह के समय जनरेटर चलाना पड़ा है। कई बार ऐसा हुआ है कि महीने में दस से 12 दिन ही कुछ घंटे जनरेटर चलता है। नगर निगम के जल-कल विभाग के सूत्रों ने 14 ट्यूबवेल पर लगे जनरेटर में प्रत्येक महीने आठ से दस लाख रुपये का डीजल खर्च होने की जानकारी दी।
चूंकि लोग अक्सर पानी की किल्लत होने की शिकायत करते रहे हैं। ऐसे में डीजल पर इतना बड़ा खर्च नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
नगर निगम के तेल से दौड़ रही सपा नेताओं की गाड़ियां?
नगर निगम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि नगर निगम के तमाम जेसीबी, ट्रक और अन्य सरकारी गाड़ियों तथा ट्यूबवेल पर लगे जनरेटर के लिए प्रत्येक महीने लाखों रुपये का डीजल खर्च होना दर्शाया जा रहा है। आरोप है कि सत्ताधारी पार्टी सपा के अनेक नेता ऐसे हैं, जिन्होंने नगर निगम के संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों के साथ सेटिंग की हुई है। इस सेटिंग की वजह से नगर निगम के खर्चे से आने वाला डीजल उनकी गाड़ियों में डाला जा रहा है।