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कोर्ट में अपने बयान से मुकर गए धर्मेंद्र के परिजन

Fri, 03 Mar 2017 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
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मृतक धर्मेंद्र (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर के सरसावा थाना पुलिस की हिरासत में युवक की मौत का मामला पूरी तरह से बदल चुका है। पुलिस ने पीड़ित परिवार के कोर्ट में बयान करा दिए हैं। जिसमें बताया जा रहा है कि पीड़ितों ने युवक को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने से ही इंकार कर दिया है।
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जिससे युवक की मौत की कहानी पूरी तरह से बदल गई है। ऐसे में बवाल करने के मामले में अब तक पीड़ित बना परिवार अब तोड़फोड़, पथराव, जाम, झूठी एफआईआर कराने के मामले में फंसता नजर आ रहा है। 

सरसावा में 10 फरवरी की रात को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए धर्मेंद्र की थर्ड डिग्री देने से मौत हो गई थी। इस मामले में परिजनों ने दलित समाज के लोगों के साथ मिलकर जमकर बवाल किया।
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थाने में तोड़फोड़ की गई, पथराव किया गया, लोगों ने रास्ता जाम कर दिया और एसओ संजय पांडेय समेत छह पुलिस कर्मियों पर थर्ड डिग्री देकर हत्या करने का मामला दर्ज करा दिया।

धर्मेंद्र के पिता चूहड़ सिंह ने खुद को चश्मदीद बताते हुए आरोप लगाया था कि वह हवालात में जाकर अपने बेटे धर्मेंद्र को खाना खिलाकर आए थे। उसके परिजनों ने तो यहां तक कहा था कि वह जब थाना पहुंचे तो धर्मेंद्र को पुलिस वाले थर्ड डिग्री दे रहे थे और धर्मेंद्र चीख रहा था।

फिर झूठी कहानी बनाकर पुलिस ने उसको पेड़ पर लटका दिया और आत्महत्या दर्शाने का प्रयास किया। 20 दिन से मामले को लेकर पुलिस की काफी फजीहत हुई। पुलिस ने सामने रहते हुए भी किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

जांच अधिकारी पुलिस क्षेत्राधिकारी बीपी जाखड़ मामले को सिर्फ जांच में उलझाए रहे और पीड़ित परिवार को साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाते हुए मामले को खत्म करने में लगे रहे। 

आखिरकार पुलिस ने दो दिन पूर्व धर्मेंद्र के परिजनों को कोर्ट में ले जाकर बयान करा दिए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पिता ने कोर्ट में बयान दे दिए हैं कि पुलिस ने धर्मेंद्र को हिरासत में लिया ही नहीं था।

उसकी मां ने भी इसी प्रकार का बयान दे दिया। इससे हो सकता है कि आरोपी पुलिसकर्मी हत्या के मामले से साफ बच जाएं। इस मामले में एसओ संजय पांडेय और अन्य पुलिस कर्मियों को क्लीन चिट मिल जाए, लेकिन पीड़ित परिवार इस मामले में फंस सकता है। 

अधिवक्ताओं का कहना है कि तोड़फोड़, रास्ता जाम, हंगामा, पथराव, झूठी एफआईआर दर्ज कराए जाने के मामले में पीड़ित परिवार अब फंस सकता है। बयान के बाद पुलिसकर्मी तो बच निकलेंगे, लेकिन उसके बाद की कार्रवाई तो पुलिस को करनी होगी।

कोर्ट भी इस मामले में स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई करने के आदेश दे सकती है। तीन साल पहले भी इस प्रकार का मामला हो चुका है, जिसमें कोर्ट ने संज्ञान लेकर पीड़ितों के खिलाफ ही मुकरने के बाद मामला दर्ज करा दिया।
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