सहारनपुर। महानगर में जलभराव से निपटने के लिए नगर निगम नालों की सफाई करा रहा है, लेकिन बाढ़ का कारण बनने वाली पांवधोई और ढमोला नदी को लेकर अभी कोई योजना तैयार नहीं की गई है। नतीजा, यह है कि दोनों नदियों में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा भरा है, जो बरसात में समस्या खड़ी कर सकता है।
पांवधोई नदी की कुल लंबाई सात किलोमीटर है। शहरी क्षेत्र में यह करीब साढ़े पांच किलोमीटर का सफर तय करती है। जहां तक यह गांव में है वहीं तक साफ है। उसके बाद उसमें तमाम तरह की गंदगी है। धोबीघाट के पास भारी मात्रा में सिल्ट जमा है। हालांकि समय-समय पर यहां से कचरा निकाला जाता है, लेकिन लोग यहां धार्मिक अनुष्ठान की सामग्री लाकर फेंकते हैं। ज्यादातर लोग पॉलिथीन में भरी हुई सामग्री डालते हैं, जो इकट्ठी होकर कचरे का रूप लेती है। धोबीघाट पर ऐसा ही कचरा जमा है।
ढमोला नदी की बात करें तो सबसे अधिक गंदगी इसी में है। राकेश टाकीज के पास करीब 100 मीटर तक प्लास्टिक कचरा नदी में तैर रहा है। इसके अलावा शहर में प्रवेश से लेकर एसटीपी तक इसमें जगह जगह कचरा और सिल्ट जमा है। बीते वर्ष मई-जून में नगर निगम ने नदी की सफाई का अभियान चलाया था, जो अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
यहां बनाए हैं मशीनें उतरने के रैंप
ढमोला नदी और पांवधोई नदी की सफाई के लिए नगर निगम ने जगह-जगह रैंप बनाए हुए हैं। पांवधोई नदी में विश्वास नगर पुल के पास, बाबा लालदास का बड़ा, पुल खुमरान, दालमंडी पुल, पुल चाकी सराय आदि जगहों पर रैंप बनाए हैं। इसी प्रकार ढमोला नदी पर सपना टाकीज, राकेश टाकीज, नुमाइश कैंप, हकीकतनगर पुल, टैगोर गार्डन, पिंजौरा गांव और वार्ड 37 में रैंंप बने हैं।
अभी महानगर के नालों की सफाई का अभियान चल रहा है, जिसे 25 मई से पहले निपटा रहे हैं। पांवधोई की सफाई सालभर की जाती है। ढमोला नदी को भी बरसात से पहले साफ करने की योजना है।
-डॉ. प्रवीण शाह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम