सहारनपुर। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनाने में विभाग ज्यादा रुचि नहीं ले रहा है। बेसिक शिक्षा परिषद के आदेश के करीब छह माह बाद भी स्मार्ट क्लास के लिए दानदाता नहीं तलाशे जा सके हैं।
शासन की मंशा है कि प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में स्मार्ट क्लास बनाई जाए, जिससे गरीब से गरीब बच्चे को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा सके। इसके लिए करीब छह माह पहले बेसिक शिक्षा परिषद ने आदेश जारी किया था। आदेश में परिषद ने कहा था कि विभाग और विद्यालय प्रबंधन ऐसे दानदाता की तलाश करेंगे जो स्मार्ट क्लास को बनाने में आर्थिक मदद कर सकें। ऐसे लोगों या संस्थाओं की तलाश करने को कहा गया था, जो स्मार्ट क्लास के लिए आर्थिक मदद या फिर सामान जैसे जनरेटर, इनवर्टर, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर आदि दे सकें। परिषद ने यह भी कहा है कि जो लोग इसमें सहयोग करेंगे उनके नाम की प्लेट क्लास के बाहर लगाई जाए। मगर छह माह बाद भी विभाग दानदाता नहीं तलाश पाया है।
विद्यार्थियों को पठन-पाठन में होगी आसानी
परिषदीय विद्यालयों में के बच्चों के पठन-पाठन संबंधी अनेक सामग्री यू-ट्यूब और इंटरनेट पर उपलब्ध है। यदि परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनती हैं तो बच्चे प्रोजेक्टर पर उक्त वीडियो के जरिए अपनी पढ़ाई को आसानी से कर सकते हैं।
जिले में 1332 स्मार्ट क्लास की जरूरत
जनपद में वर्तमान में 1438 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें से 116 विद्यालयों में दो साल से स्मार्ट क्लास बनाई गई थी। नगर क्षेत्र में नगर निगम सभी 51 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनाने जा रहा है। इनके बाद शेष 1271 विद्यालय बचते हैं, जिनमें स्मार्ट क्लास बनाए जाने की जरूरत है।
प्रत्येक विद्यालय में स्मार्ट क्लास बनाया जाना परिषद की अच्छी पहल है। हमने कुछ ही दिन पहले ज्वाइन किया है। योजना पर कितना काम हुआ है और कितना नहीं इसकी जानकारी नहीं है। मगर हमारा प्रयास यही रहेगा कि दानदाता तलाशकर अधिक से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास बनवाई जा सकें।
अंबरीश कुमार, बीएसए।