सहारनपुर। बीते वर्ष अप्रैल से जुलाई तक सरकारी अस्पतालों में हुए प्रसव के सापेक्ष इस बार 1452 प्रसव कम हुए हैं। इसकी वजह कोरोना को माना जा रहा है। जिला महिला अस्पताल में भी प्रसव की संख्या करीब 25 फीसदी घटी है।
वर्ष 2019 में अप्रैल से जुलाई तक जिले भर में जिला महिला अस्पताल और तमाम सीएचसी पर कुल 10180 प्रसव हुए थे। इस बार अप्रैल से जुलाई तक 8728 ही प्रसव हुए। प्रसव घटने की वजह कोरोना और कोरोना की वजह से लगा लॉकडाउन बताया जा रहा है। गौरतलब है कि इस बार कोरोना के चलते 22 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था, साथ ही कोरोना को लेकर लोग भयभीत थे। सरकारी अस्पतालों में प्रसव से पहले गर्भवतियों की कोरोना जांच की भी अनिवार्यता थी, जो वर्तमान में भी है। जिला महिला अस्पताल में डॉक्टर के साथ ही कई गर्भवतियां भी पॉजिटिव निकल चुकी हैं। कई सीएचसी के स्टाफ सदस्य भी पॉजिटिव आए हैं। ऐसे में कोरोना को लेकर सभी शर्तों का पालन किया जा रहा है, जबकि अनेक निजी नर्सिंग होम बिना कोरोना की जांच के भी सुरक्षित तरीके से प्रसव करा रहे हैं। शायद कोरोना की जांच और कोविड सेंटर में जाने से बचने के लिए लोगों ने निजी अस्पतालों को तरजीह दी।
इन सीएचसी पर बढ़ी संख्या
नकुड़ में बीते वर्ष अप्रैल से जुलाई तक 325 प्रसव के सापेक्ष इस बार 451, मुजफ्फराबाद में बीते वर्ष के 531 प्रसव के सापेक्ष इस बार 743, नानौता में पिछले साल के 446 प्रसव की तुलना में इस बार 492, नागल में गत वर्ष के 299 प्रसव के सापेक्ष 353 और हरौड़ा में बीते वर्ष के 55 प्रसवों की तुलना में 96 प्रसव हुए हैं।
यहां घटी प्रसवों की संख्या
अस्पताल------------------ 2019 ------- 2020
जिला महिला अस्पताल --- 3589 ------- 2679
रेडक्रॉस हॉस्पिटल ---------- 05 --------- 01
गंगोह ------------------- 1122 ------- 1025
देवबंद -------------------- 574 -------- 400
बेहट --------------------- 290 -------- 246
सुनहेटी खड़खड़ी ------------300 -------- 264
सरसावा -------------------386 -------- 308
साढ़ौली कदीम --------------654--------594
पुवांरका ------------------- 413--------402
चिलकाना ------------------389--------382
कोविड सेंटर के चलते नहीं हुए प्रसव
प्रशासन ने सीएचसी फतेहपुर में कोविड सेंटर बनाया हुआ है। यही वजह है कि कोरोना के डर की वजह से इस बार अप्रैल से जुलाई तक एक भी प्रसव यहां नहीं हुआ है, जबकि बीते वर्ष 435 प्रसव हुए थे। राजकीय मेडिकल कॉलेज में भी कोविड सेंटर है। यहां इस बार अप्रैल से जुलाई तक एक प्रसव हुआ। बीते वर्ष पांच प्रसव हुए थे।
निश्चित रूप से कोरोना के कारण सरकारी अस्पतालों में होने वाले प्रसवों की संख्या घटी है। वर्तमान में भी हम बिना कोविड की जांच कराए प्रसव नहीं करा रहे हैं। यह प्रसूता और उसके बच्चे के साथ ही डॉक्टर और स्टाफ की सेहत के लिए भी बेहतर है। मगर यदि कुछ सीएचसी पर कम प्रसव हुए हैं, तो कुछ पर संख्या बढ़ी भी है।
-- डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।