सहारनपुर। तेजी से फैलते संक्रमण को रोकना ही सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। क्योंकि सजग रहते हुए उपचार करने तथा खुद के साथ दूसरों की चिंता करने से इसे परिवार में फैलने से रोका जा सकता है। ऐसा ही किया नंदकिशोर जोशी के परिवार ने, जो पेपर मिल रोड पर आईआईटी रुड़की के आईपीटी कैंपस में रहता है।
परिवार में पत्नी रुचि और पांच वर्षीय बेटा है। रुचि की गत 25 मार्च को कोविड जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके बाद नंद किशोर ने रुचि को मकान के एक कमरे में आइसोलेट कर दिया। चूंकि बेटा छोटा था, इसलिए नंदकिशोर पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई थी, लेकिन एक तरफ रुचि ने कोरोना से जंग लड़ी तो नंदकिशोर ने घर की जिम्मेदारी संभाली। नंदकिशोर जोशी बताते हैं कि 17 दिन तक उनकी पत्नी होम आइसोलेशन में रहीं।
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उपलब्ध कराई गई कोविड किट से मिली दवाएं इस्तेमाल कीं। इसके अलावा स्वस्थ रहने के लिए सुबह और शाम दोनों समय योगाभ्यास किया। काढ़े का भी सेवन नियमित करती रहीं और रात में हल्दी वाला दूध पिया। रोजाना ही शरीर का तापमान और ऑक्सीजन स्तर चेक करती रहीं। अब रुचि पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह कहती हैं कि होम आइसोलेशन में रहकर भी कोरोना को हराया जा सकता है, लेकिन उसके लिए नियमों का पालन करना अनिवार्य है। मानसिक रूप से बीमारी को अपने ऊपर हावी ना होने दें, बल्कि उचित उपचार करते रहें और इसी तरह बीमारी को हराया जा सकता है। नंदकिशोर जोशी ने बताया कि जब तक उनकी पत्नी आइसोलेशन में रहीं, तब तक बेटे की देखभाल से लेकर अपने लिए खाना बनाने, साफ सफाई आदि सभी कार्य खुद गिए। पत्नी को कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया, ताकि संक्रमण परिवार के अन्य सदस्यों तक न पहुंचने पाए।