सरसावा/सहारनपुर। पटाखा फैक्टरी में विस्फोट इतना जबरदस्त था कि एक किमी दूर तक मलबा जाकर गिरा है। इसके साथ ही गांव बलवंतपुर और सलेमपुर में ग्रामीणों की छतों तक फैक्टरी के अवशेष पहुुंचे और शीशे टूट गए। गोविंदपुर की आबादी वाले इलाके में धमाके से कुछ सामान क्षतिग्रस्त हुआ।
विस्फोट की सबसे पहले जानकारी देने वाले नागरिक सुरक्षा कोर के वार्डन रवि चौधरी ने बताया कि विस्फोट की तीव्रता और धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि करीब एक हजार मीटर दूर उनके रेस्टोरेंट की टीनशेड पर फैक्ट्री का मलबा गिरा, जिससे उनकी टीन शेड और रेस्टोरेंट क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, विस्फोट का मलवा ग्राम गोविंदपुर व बलवंतपुर में लोगों की छतों पर भी गिरा। गनीमत रही कि जिस स्थान पर फैक्ट्री थी, वह आबादी से काफी दूर अंदर जंगल में थी, जिससे गांव की आबादी इस विस्फोट की जद में आने से बच गई। हालांकि विस्फोट की तीव्रता इतनी थी कि वैष्णव धाम मंदिर के खिड़कियों के शीशे चटक गए। गांव में भी एक दीवार दरार आई है।
एटीएस और फोरेंसिक टीम भी पहुंची
विस्फोट की जांच के लिए फोरेंसिक विभाग और एटीएस की टीम भी मौके पर पहुंची, जिन्होंने आसपास के क्षेत्र से विस्फोट में प्रयोग हुई सामग्री की जांच के लिए नमूने एकत्र किए। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि कई किलोमीटर तक गूंज सुनाई गई। किस पदार्थ से विस्फोट हुआ है। इसलिए एटीएस और फोरेंसिक टीम को बुलाया गया है।
कारण तलाश में जुटा पुलिस-प्रशासन, मानक थे पूरे
धमाके कारण जानने के लिए पुलिस-प्रशासन की टीमें लगी है। पता लगाया जा रहा है कि कितनी विस्फोटक सामग्री थी और किस केमिकल की वजह से हादसा हुआ है। फैक्टरी में रखा सिलिंडर सही मिला है। वहीं, अग्निशमन यंत्र भी मलबे में पड़े मिले हैं। अधिकारियों के मुताबिक फैक्टरी लाइसेंसी थी और सभी मानक भी पूरे थे। फिर हादसा कैसे हो गया, इस सवाल का जवाब तलाशने में पुलिस-प्रशासन की टीमें लगी हैं।
इन बिंदुओं पर हो रही जांच
-- फैक्टरी में कितनी थी विस्फोटक सामग्री
-- गर्मी की वजह से रगड़ से चिंगारी तो नहीं निकली
-- केमिकलों का मिश्रण तो गलत तरीके से नहीं किया गया
-- विस्फोटक सामग्री रख-रखाव के सभी मानक पूरे थे क्या
-- रोजाना कितने लोग फैक्टरी में करते थे काम
-- किस विस्फोटक की वजह से होता है इतना तेज धमाका