सहारनपुर। बच्चे के जन्म से घर में किलकारी गूंजती है, पर जन्मजात दोष किसी जख्म से कम नहीं। छह महीने में 54 नवजातों ने दिल में छेद के साथ जन्म लिया। आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों को इलाज न करा पाने का दर्द सालता रहा। ऐसे में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
जिले में वर्ष 2010 से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) चल रहा है। कार्यक्रम के तहत स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर 24 टीम काम कर रही है। यह टीम सोमवार से शुक्रवार तक 44 तरह की बीमारियों से ग्रसित बच्चों को चिह्नित करती है। वहां से जिला अस्पताल भेजा जाता है। यहां इलाज नहीं होने पर बच्चों को रेफर किया जाता है। अप्रैल से सितंबर 2025 तक 2,87,809 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें 11,917 बच्चे अलग-अलग बीमारी से ग्रसित मिले। 11,503 का इलाज हो गया है। 54 बच्चों में दिल का छेद होने की पुष्टि हुई। इनमें से 27 बच्चों का ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो चुका है। 27 बच्चे ऐसे हैं, जिनका इलाज चल रहा है। उनकी अभी सर्जरी नहीं हुई है।
शहरी क्षेत्र में भी चल रहा कार्यक्रम
आरबीएसके की कार्यक्रम प्रबंधक मोनिका ने बताया कि शहरी क्षेत्र में भी कार्यक्रम चल रहा है। शहरी क्षेत्र में दो टीमें काम कर रही हैं। एक टीम में चार सदस्य हैं। अप्रैल से सितंबर तक टीम 1,92,434 बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करा चुकी है। 113 रेफर किए। 93 बच्चों का इलाज पूरा कराया।
केस नंबर-एक
नकुड़ क्षेत्र के गांव साहब माजरा निवासी विकास के बेटे अर्नव को जन्मजात दिल का छेद था। उन्होंने काफी जगह इलाज कराया। आरबीएसके की टीम से संपर्क हुआ। टीम ने 19 अगस्त 2025 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में दिल के छेद की सर्जरी कराई। बच्चा ठीक है।
केस नंबर-दो
नकुड़ निवासी वाजिद की बेटी सिदरा को जन्मजात दिल के छेद की बीमारी थी। आरबीएसके टीम को नकुड़ सीएचसी से पता चला। इसके बाद स्वास्थ्य परीक्षण किया। अगस्त 2025 में दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सर्जरी हुई।