सहारनपुर जिले के करीब पचास दलित परिवारों ने शनिवार को बौद्ध धर्म अपनाने का दावा किया है और देवी-देवताओं के चित्रों को मानकमऊ स्थित बड़ी नहर में प्रवाहित कर दिया।
बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के सवाल पर इन्होंने कहा कि मूर्ति पूजा बंद कर दी है और शीघ्र एक कार्यक्रम दीक्षा लेंगे। हालांकि प्रशासन और पुलिस अधिकारी इसे दबाव बनाने की रणनीति मानकर चल रहे हैं।
शनिवार को ग्राम मानकमऊ, सबदलपुर, उनाली, बाड़ी माजरा, बनी खेड़ा के कुछ दलित हाथों में देवी देवताओं के चित्र एवं मूर्तियां लेकर मानकमऊ स्थित बड़ी नहर पर पहुंचे और उन्हें नहर में प्रवाहित कर दिया।
इन्होंने दलितों के उत्पीड़न के विरोध में बौद्ध धर्म अपनाने की बात कही है। इनका नेतृत्व कर रहे सूर्य कर्णवाल से जब दीक्षा लेने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मूर्ति पूजा तो आज से ही बंद कर दी है।
शीघ्र एक कार्यक्रम कर दीक्षा भी ली जाएगी। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म में रहते हुए जब उनका उत्पीड़न किया जा रहा है तो ऐसे धर्म में रहने का कोई औचित्य नहीं है।
इस मौके पर सूरज कुमार, धूम सिंह, विशाल, गौतम, विक्रम, अनिल कुमार, मोहित, शीशपाल, नीतिश, रजत समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे। बता दें, बृहस्पतिवार को भी तीन गांव रूपड़ी, कपूरपुर और ईघरी के दलित समाज के 180 परिवारों ने बौद्ध धर्म अपनाने का दावा किया था। बामियान बौद्ध शिक्षा संस्थान के संरक्षण ज्ञानचंद आजाद ने बताया कि उन्हें गांव के ही एक आचार्य ने दीक्षा दी थी।