ढमोला नदी की भूमि पर कब्जा करने के आरोप में बुधवार को सिंचाई विभाग ने एक साथ सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी। एफआईआर दर्ज होने के बाद लोगों में खलबली मच गई। लोगों ने कार्रवाई के डर से अपील करनी शुरू कर दी है।
शहर के बीच से होकर गुजर रही जीवनदायिनी ढमोला नदी की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं है। सिंचाई विभाग ने अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई तेज कर दी है। अपर खंड पूर्वी यमुना नहर के तीन कर्मचारियों के आने के बाद एक साथ सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है।
इनमें गोविंदनगर निवासी पूजा चौधरी, रमेश, गिल कॉलोनी निवासी कश्मीरी, विवेक विहार निवासी पहलवान श्यामलाल, चेतन राणा, निरंजन सिंह, त्यागी भट्ठे वाले शामिल हैं। सिंचाई विभाग द्वारा एफआईआर कराने के बाद लोगों में अब टेंशन बढ़ गई है। लोग सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कार्रवाई न करने की अपील कर रहे हैं।
अपर जिलाधिकारी वित्त हरीश चंद्र का कहना है कि अब सभी लोग अतिरिक्त कार्यों से मुक्त हो चुके हैं और एफआईआर की प्रक्रिया में लग गए हैं। 15 दिन में सभी लोगों पर एफआईआर करा दी जाएगी और ध्वस्तीकरण भी शुरू करा दिया जाएगा।
खाली करनी होगी जमीन
गिल कॉलोनी के एक कब्जेदार ने सिंचाई विभाग के नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी। लेकिन, कोर्ट ने एक ही सुनवाई में केस फाइनल करते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी जांच कर कार्रवाई करें। इस कारण अब अपीलकर्ता को भूमि खाली करनी होगी।
कुछ ने की अपील, कुछ ने दिया शपथपत्र
सिंचाई विभाग द्वारा कराई गईं एफआईआर से अवैध कब्जा करने वाले लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि कुछ लोगों ने सिंचाई विभाग में अपील दाखिल कर सही पैमाइश कराने की मांग की है। जबकि, कुछ लोगों ने शपथ पत्र देकर कहा है कि उन पर कार्रवाई करने की बजाय जितनी भूमि सरकारी है, उसे पैमाइश करके ले लें, शेष को छोड़ दें।
खबर छपते ही कर लिया तीन ने ज्वाइन
अपर खंड यमुना नहर के चार सींचपाल और एक जिलेदार को प्रशासन द्वारा संबद्ध किए जाने के बावजूद पांचों ने ज्चाइन नहीं किया। लेकिन, अमर उजाला में समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने दबाव बनाया और पांच में से तीन कर्मचारियों ने तुरंत ही ज्वाइन कर लिया। जिनमें दो सींचपाल और एक जिलेदार शामिल है।