गरीबी और सरकारी कर्ज न चुका पाने के कारण गांव बसेड़ा का एक किसान फांसी पर झूल गया। किसान की मौत के बाद उसके परिवार में कोहराम मच गया। सीओ और तहसीलदार ने गांव पहुंच कर मृतक के परिजनों से जानकारी ली। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।
नागल थाना क्षेत्र के गांव बसेड़ा निवासी 42 वर्षीय महावीर उर्फ भुल्लन त्यागी पुत्र सोमदत्त त्यागी के नाम आठ बीघा जमीन है। ग्रामीणों ने बताया कि किसान पर स्टेट बैंक आफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, सहकारी समिति और विद्युत निगम का करीब चार लाख रुपये बकाया था।
परिजनों के अनुसार आए दिन अमीन और विद्यऊत निगम के कर्मचारी उस पर दबाव बना रहे थे। इसके चलते वह तनाव में था।
बुधवार रात करीब 11 बजे वह घर से लापता हो गया। परिजनों ने गांव और आसपास उसकी तलाश की लेकिन उसका कोई पता न चल सका। बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे गांव के कुछ युवकों ने राकेश त्यागी के नलकूप पर स्थित पापुलर के पेड़ पर फंदे पर झूलती लाश देखी। इस पर उन्होंने गांववालों को जानकारी दी।
सूचना पर सैकड़ों ग्रामीण वहां एकत्र हो गए। लाश की शिनाख्त महावीर त्यागी के रूप में हुई। उसके घर में खबर लगते ही कोहराम मच गया। उसकी पत्नी, चार बच्चों का बुरा हाल था। बाद में सीओ देवबंद सुरेशपाल सिंह और तहसीलदार आलोक कुमार गुप्ता ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
बनाया जा रहा था दबाव
बसेड़ा निवासी महावीर पर स्टेट बैंक आफ इंडिया का दो लाख कर्ज था, जो करीब तीन साल पहले लिया गया था। जबकि पंजाब नेशनल बैंक का एक लाख रुपये बताया गया है जो चार साल पहले लिया गया था। सहकारी समिति का 50 हजार कर्जा बताया गया जो दो साल पहले लिया गया था।
इसके विद्युत निगम के 25 हजार रुपये बताए गए हैं। परिजनों के अनुसार विद्युत निगम के कर्मचारी उन पर जमा करने का दबाव बना रहे थे। न देने पर महावीर को जेल भेजने की धमकी तक दे रहे थे। इसी तरह बैंक कर्मी और अमीन भी उस पर दबाव बना रहे थे।
इस संबंध में तहसीलदार आलोक कुमार गुप्ता का कहना था कि किसान पर कर्ज की बात तो पता चली है लेकिन किसी भी बैंक या विभाग की ओर से आरसी नहीं कटी थी। ऐसे में अमीन द्वारा तंग करने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है।