सहारनपुर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में सोमवार को दलित समाज सड़कों पर उतर आया। हाथों में डंडे लिए दलित संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बाजारों को जबरन बंद कराया।
कई दुकानों में तोड़फोड़ की वजह से बाजारों में अफरा-तफरी की स्थिति रही। बाद में डीएम और एसएसपी द्वारा मौके पर पहुंचकर ज्ञापन लेने के बाद ही दलितों का गुस्सा शांत हुआ और वह लौट गए।
सोमवार की सुबह करीब दस बजे दलित संगठनों के कार्यकर्ता कलक्ट्रेट तिराहे पर जाम लगाया। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। मगर कुछ ही देर बात सूचना मिली कि कुछ दलित संगठनों ने घंटा घर पर जाम लगा दिया है।
इसके बाद कलक्ट्रेट तिराहे पर जाम लगा रहे दलित संगठनों के कार्यकर्ता भी घंटा घर के लिए निकल पड़े। जिला अस्पताल तिराहे पर भी कुछ संगठनों के द्वारा जाम लगाया गया। यहां करीब आधा घंटा जाम के बाद दलित संगठन घंटाघर की ओर रवाना हुए।
इसके बाद घंटा घर से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी गई। दलित संगठनों के कार्यकर्ता टोलियों में मोदी और योगी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए घंटाघर पहुंचते रहे। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या हजारों में बदल गई।
घंटा घर के आसपास के बाजारों में दलित संगठनों ने जबरन दुकानेें बंद कराईं। दुकानदारों के साथ गाली गलौच की गई। हाथों में डंडे लिए दलितों को दुकानों की ओर आता देख बाजारों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद दुकानों के शटगर गिरते चले गए।
घंटा घर चौक पर हजारों की संख्या में दलितों ने जमकर हंगामा किया। दलित युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ नारे लगा रहे थे। दलितों की भारी भीड़ होने की वजह से पुलिसकर्मी दूर खड़े तमाशबीन बने रहे।
सिटी मजिस्ट्रेट राजेश कुमार मौके पर पहुंचे। मगर प्रदर्शनकारियों का कोई नेतृत्व कर्ता न होने की वजह से सिटी मजिस्ट्रेट आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर सके। सुबह दस बजे से दोपहर ढाई बजे तक भीड़ लगातार बढ़ती चली गई।
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि डीएम मौके पर पहुंचकर ज्ञापन लें। इसके बाद डीएम पीके पांडेय और एसएसपी बबलू कुमार मौके पर पहुंचे, जिनको दलित संगठनों के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपा। इसके बाद ही दलित संगठन घंटा घर छोड़ने को तैयार हुए। साथ ही प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
दूर खड़े रहे बसपा नेता
घंटा घर पर जाम और प्रदर्शन के दौरान पूर्व विधायक जगपाल सिंह, रविंद्र कुमार मोल्हू और हाजी फजलुर्रहमान समेत कई बसपा नेता भी पहुंचे थे। चूंकि आंदोलन गैर राजनीतिक था। ऐसे में वह भीड़ के बीच जाने की हिम्मत नहीं कर सके। वह दूर खड़े होकर आंदोलन को देखते रहे। दलित संगठन या उनके कार्यकर्ताओं ने भी बसपा नेताओं की अनदेखी की।
डीएम पहले पहुंचते तो जल्द खुल जाता जाम
घंटा घर पर जाम लगाने वाले दलित संगठन डीएम को ही ज्ञापन देने की जिद पर अड़े थे। मगर मौके पर मौजूद अधिकारियों ने डीएम को मौके पर बुलाना जरूरी नहीं समझा। और वह खुद ही ज्ञापन लेने की कोशिश करते रहे। इसी वजह से जाम करीब पांच घंटे तक रहा। यदि डीएम को पहले ही बुला लिया जाता तो जाम पांच घंटे ना रहता। क्योंकि डीएम और एसएसपी के मौके पर पहुंचने के बाद दलित संठन ज्ञापन देते ही घंटाघर से हटना शुरू हो गए थे।
बंद में यह संगठन रहे शामिल
सोमवार को भारत बंद में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संयुक्त मोर्चा, भीम आर्मी भारत एकता मिशन, आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, राष्ट्रीय दलित क्रांति मोर्चा, अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ, महानगर कांग्रेस कमेटी (एससी प्रकोष्ठ), अखिल भारतीय खटीक महासभा, भारतीय मूल निवासी सम्यक संघ ट्रस्ट, द बुद्धिष्ट सोसायटी ऑफ इंडिया, दलित सेना, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन आदि संगठनों ने प्रतिभाग किया।
दलित संगठनों की ओर से मुझे एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें एससी/एसटी एक्ट पर पुनर्विचार की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है। मैं प्रभारी मंत्री के साथ गणेशपुर में था, जिसकी वजह से घंटा घर पर पहुंचने में थोड़ा समय लगा। यदि दफ्तर पर होता तो सबसे पहले घंटा घर पहुंचकर दलित संगठनों की बात सुनते। फिर भी अच्छी बात यह है कि सहारनपुर में कोई तोड़फोड़ या उपद्रव नहीं हुआ।
पीके पांडेय, डीएम।