सीधे उपभोक्ता से बैंकों में पुरानी करेंसी को लेना बंद करने के बाद शामली के एक बैंक के बैंक कर्मचारी द्वारा 38 लाख की पुरानी करेंसी को 8 लाख रुपये के नए नोटों से बदलना था। ये 38 लाख रुपये 31 मार्च से पहले ही बैंक में जमा कराने की योजना थी। लेकिन नोटों के पकड़े जाने के बाद बैंक कर्मचारी की दलाली की पोल खुल गई और यह भी उजागर हो गया कि कुछ बैंकों के दलालों ने नोटबंदी के दौरान कितना बड़ा खेल किया होगा। पुलिस अब इस हेरफेर की जांच में जुट गई है।
नगर कोतवाली पुलिस द्वारा पकड़े गए देहरादून निवासी परमजीत ने कालेधन को बैंकों में पहुंचाने के मामले का खुलासा किया तो पुलिस अधिकारी भी अवाक रह गए। नगर कोतवाली प्रभारी संजय वर्मा ने बताया कि परमजीत के 38 लाख रुपयों की पुरानी करेंसी को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी शामली के सहकारी बैंक के सहारनपुर निवासी एक कर्मचारी ने ली थी। सौदा तय हुआ था कि 38 लाख रुपये की पुरानी करेंसी के बदले 8 लाख रुपये की नई करेंसी दी जाएगी।
30 लाख रुपये की पुरानी करेंसी बैंक कर्मचारी की होगी। 30 लाख रुपये में किस-किस का हिस्सा रहेगा इस बात पर उसने चुप्पी साध ली। पुलिस के अनुसार बैंक कर्मचारी को 38 लाख रुपये की पुरानी करेंसी 31 मार्च से पहले बैंक में जमा करानी थी। लेकिन वह बैंक में जमा कराने में सफल नहीं हो पाया। मामला बिगड़ने पर परमजीत और बैंक कर्मचारी में मारपीट हो गई और पुलिस की गिरफ्त में फंस गए। पुलिस अब नोटबंदी के बाद अब इस तरह की हेरफेर की जांच में जुट गई है।
यह बानगी तो तब है जब बैंकों में पुरानी करेंसी पर पूरी तरह से रोक लग गई है। सरकार के कालेधन पर रोक लगाने की योजना पर कुछ बैंकों के कर्मचारियों ने ही पानी फेरने का प्रयास किया। बैंकों कुछ कर्मचारियों ने धड़ल्ले से पिछले दरवाजे से बड़े कारोबारियों एवं धनाढ्यों की काली कमाई को बैंकों में पहुंचा दिया। पकड़े गए आरोपियों ने इस बात का भी खुलासा किया है कि बैंकों में नोटबंदी के दौरान जमकर कालेधन को जमा किया गया और बदला गया।
आयकर विभाग को दी गई रिपोर्ट ः सहारनपुर। देहरादून निवासी परमजीत से पकड़ी गई पुरानी करेंसी के 38 लाख रुपयों के बारे में पूरी रिपोर्ट पुलिस ने आयकर विभाग के अधिकारियों को दी है। नगर कोतवाली प्रभारी संजय वर्मा ने बताया कि इतनी धनराशि कहां से आई और अब तक क्यों छिपाए रखा गया। इसकी जांच आयकर विभाग करेगा।
सामने आया कालेधन का काला धंधा
सहारनपुर में कालेधन को बदलने के काले धंधे का एक बार फिर खुलासा हुआ है। सहारनपुर के कुतुबशेर, सदर कोतवाली एवं देवबंद में पहले भी नोटों के बदलने का धंधा उजागर हो चुका है। यहां से पकड़े गए लोगों ने बताया कि 25 प्रतिशत तक में उन्होंने पुराने के बदले नए एवं चलन वाले छोटे नोट दिए थे। बैंक कर्मचारी द्वारा 38 लाख रुपये की पुरानी करेंसी को बदलने का ठेका लिए जाने से एक बार फिर से यह साबित हो रहा है कि कुछ बैंकों में अभी भी इस प्रकार का काला कारोबार हो रहा है।