सहारनपुर। भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज विकल की बैठक में देवबंद कारागार में कैदियों के सुधार के लिए ब्रह्मकुमारी विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर द्वारा भगवान वाल्मीकि के लिए की गई अशोभनीय टिप्पणी की निंदा की।
बैठक में समाज के मंडल अध्यक्ष वीर सोनू बिरला ने कहा कि प्रोफेसर द्वारा भगवान वाल्मीकि के लिए की गई अशोभनीय टिप्पणी कर अपरिपक्व मानसिकता दिखाई है। यह टिप्पणी निराधार और दलित विरोधी मानसिकता है। जबकि जालंधर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर मंजूलता सहदेव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि भगवान वाल्मीकि के प्रति कोई व्यक्ति अपने भाषण, लेखन अभिव्यक्ति, चित्रण अथवा किसी अन्य प्रकार से उनकी छवि कलंकित करने का प्रयास करेगा तो वह दंडनीय अपराध होगा। जिसके लिए 4 से 7 साल का कारावास होगा। पूर्व जिला संयोजक हरीश बहोत एवं विनोद वैद्य ने कहा कि आरोपी प्रोफेसर द्वारा भगवान वाल्मीकि के प्रति ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना भरतीय संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। छूआछूत और भेदभाव का जहर घोला जा रहा है। ऐसे कृत्य करने से उन्हें हिंदू धर्म छोड़ने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने आरोपी पर मुकदमा कायम नहीं किया तो संगठन आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। बैठक में चौधरी तिलक राज बिरला, सुनेश समर्पित, अश्वनी बिरला, कमल टांक, सूरज बबरीक, पारस, दीपक बिरला, सावन बहोत, सुनील, सतीश प्रधान, रीटा कांगड़ा, बलवीर, संदीप, शौकीन, राखी कांगड़ा, अनीता बिरला, भंवर सिंह, छोटे लाल, सोनू राजौरिया, राजकुमार बिरला, अमित बहोत मौजूद रहे।