96 गैंगों के 426 बदमाशों पर कैसे पार पाए खाकी
सहारनपुर। अपराधियों के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच सहारनपुर मंडल की पुलिस के लिए बदमाशों की फौज पर पार पाना आसान नहीं है। तीनों जिलों में 96 के करीब गैंग चिह्नित है, जिनके करीब 426 के करीब सक्रिय सदस्य है, जो लंबे समय से कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। इनमें से कई गैंग ऐसे रहे है, जिनके सहारे पुलिस ने दूसरों पर निशाना साधा है। तीनों जिलों में सक्रिय छुट्भैय्या अपराधियों की संख्या तो अनगिनत है, जो आए दिन आम जनता के सुख-चैन लूटने का कारण बन रहे हैं।
सहारनपुर मंडल के तीन जिलों सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिले के सूचीबद्ध गैंग पर नजर डाले तो आंकडे़ बेहद चौंकाने वाले हैं। तीनों जिलों में अधिकांश गैंग बरसों से सक्रिय है। एक सरगना को पुलिस ठिकाने लगाती है तो दूसरा कमान संभालकर पुलिस के लिए चुनौती बनकर खड़ा हो जाता है। गैंगों का यह परिवार घटता-बढ़ता रहता है। सहारनपुर जिले में सबसे ज्यादा 46 गैंग सूचीबद्ध है, जिनमें करीब 176 बदमाश है। इनमें मुकीम उर्फ काला, मोबिन, सारिक, सलीम उर्फ काला सक्रिय है। काफी गैंग तो पुराने है, जिनके बारे में पुलिस को जानकारी तक नहीं है। कुछ गैंग शांत होकर हाशिए पर हैं।
दूसरे नंबर पर मुजफ्फरनगर जनपद है। यहां सूचीबद्ध 34 गैंगों में 139 सदस्य है। इनमें सुशील मूंछ और विनोद बावला गैंग तो करीब ढाई दशक से पुलिस की नाक में दम किए हुए है।
शामली जिले में भी 17 के करीब गैंग रिकार्ड में है। इनके 111 सदस्य है। इनमें से कुछ जेल में है तो कुछ भूमिगत चल रहे हैं। बदमाशों की फौज का यह आंकड़ा तो वह है, जो सूचीबद्ध है। ऐसे बदमाशों की संख्या अनगिनत है, जो अकेले अथवा दो-तीन साथियों के साथ घटनाओं को अंजाम देकर असुरक्षा का माहौल बनाने में पीछे नहीं है।
सहारनपुर रेंज में सक्रिय बदमाशों के अलावा सूचीबद्ध् गैंगों पर शिकंजा कसने के लिए नए सिरे से मुहिम शुरू की गई है। अधिकांश गैंग बरसों से संचालित है। नए सिरे से पुराने गैंगों की सक्रियता का आंकलन कराया जा रहा है।
शरद सचान, पुलिस उप महानिरीक्षक।