सहारनपुर। मेरठ में डिप्टी सीएमओ घूस लेते पकड़े गए हैं। मगर यह स्थिति अकेले मेरठ की नहीं है। यहां भी सरकारी चिकित्सालयों में भ्रष्टाचार फैला है। बिना जेब गर्म किए कोई काम नहीं होता है। महिलाओं की डिलीवरी से लेकर तमाम कार्यों के लिए पहले पैसा देना होता है। पैसा मांगने को लेकर अस्पताल में कई बार हंगामा भी हो चुका है।
जिला और महिला अस्पताल में चिकित्सकों और स्टाफ पर रुपये लेने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ ही दिन पहले महिला अस्पताल में एक युवक से बेटा होने के नाम पर अलग-अलग कर्मचारियों ने करीब तीन हजार रुपये वसूले थे। जब युवक ने इसका विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई थी। इतना ही नहीं, प्रशासन और जन प्रतिनिधि भी सरकारी चिकित्सालयों के भीतर फैले भ्रष्टाचार से अच्छी तरह वाकिफ हैं। कुछ ही दिन पहले कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने बैठक में इस पर चिंता व्यक्त करते हुए चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को व्यवस्था में सुुधार लाने के निर्देश दिए थे। अन्यथा की स्थिति में कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद विकास भवन में हुई अनुश्रवण समिति की बैठक में सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने जिला और महिला अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों से अवैध वसूली का मामला उठाया था। अधिकारियों ने भी माना था कि ऐसा होता है। बैठक में कैराना सांसद हुकुम सिंह और डीएम पीके पांडेय समेत अनेक अधिकारी मौजूद थे। कुछ दिन पहले कांग्रेस के विधायकों ने भी जिला और महिला अस्पताल में होने वाली उगाही की शिकायत डीएम से करते हुए कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके बावजूद स्थिति में कोई बदलाव नजर नहीं आया है।
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अभी तक अवैध वसूली की कोई शिकायत मुझे मिली नहीं है। फिर भी यदि सरकारी अस्पताल का कोई चिकित्सक या स्टाफ का कोई व्यक्ति मरीज या तीमारदार से किसी तरह का पैसा मांगता है तो उसकी शिकायत सीधे मुझसे करें। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
डॉ. बीएस सोढी, सीएमओ।