सहारनपुर। बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्लाह 2011 से देवबंद में रह रहा था। 11 माह पूर्व ही चरथावल गया था। बांग्लादेशी फैजान भी कई वर्षों से देवबंद में ही रहता रहा। एटीएस और एसटीएफ ने देवबंद में दबिशें डालीं। तब तक भी पुलिस को भनक नहीं लग सकी। जब एटीएस ने आतंकी गिरफ्तार कर खुलासा कर दिया। अब पुलिस इसे एटीएस और एसटीएफ की कार्रवाई बताते हुए पल्ला झाड़ रही है।
बांग्लादेश से सहारनपुर तक आतंकी अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे। एक दो नहीं बल्कि कई वर्षों तक देवबंद में बांग्लादेशी आतंकी संगठन से जुड़े लोग रहते रहे, लेकिन पुलिस को यह भी पता नहीं चला कि जिले में विदेशी भी आकर रह रहे हैं। यहां न सिर्फ बांग्लादेशी, बल्कि आतंकी संगठनों से जुड़े काश्मीरी और बिहार के भी संदिग्ध काफी वर्षों से रह रहे हैं, लेकिन किसी को कानों कान खबर नहीं हो सकी। पुलिस और प्रशासन की इतनी बड़ी चूक किसी भी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती थी। पुलिस को किसी की भी भनक तक नहीं लगी। यही नहीं एक सप्ताह से एसटीएफ और एटीएस जिले में डेरा डाले रही, लेकिन पुलिस इसे सामान्य जांच ही समझती रही। जब भी एटीएस ने छापामारी की, पुलिस को बाद में ही कार्रवाई का पता चला। एटीएस ने तीन दिन पूर्व भी भायला रोड पर एक मकान पर छापामारी की कार्रवाई की थी, लेकिन उस समय भी पुलिस को कोई जानकारी नहीं हुई। लापरवाही तो तब हुई जब पुलिस ने उस दबिश के बाद भी कुछ नहीं किया। शनिवार की रात में कार्रवाई के बाद पुलिस अधिकारी भी हैरत में रह गए। अब इस मामले को एटीएस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई बता रहे हैं। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि एटीएस और एसटीएफ ने ही रात में कार्रवाई की है। इस बारे में स्थानीय अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी गई है।