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महिला अधिवक्ता पर हमले में दारुल उलूम के छात्रों पर शक

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महिला अधिवक्ता पर हमले में दारुल उलूम के छात्रों पर शक
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सहारनपुर। सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली महिला अधिवक्ता फरहा फैज पर पर दो साल पहले दिल्ली में ट्रेन में हुए हमले की जांच देवबंद के दारुल उलूम के छात्रों पर आकर टिक गई है। हमले में दारुल उलूम के दो छात्रों के शामिल होने का शक है। कोर्ट की फटकार के बाद दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर ने हमलावरों के स्केच दारुल उलूम प्रशासन को उपलब्ध करा दिए हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस को 26 मई तक प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी है।
सहारनपुर निवासी फरहा फैज सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। तीन तलाक और समान नागरिक संहिता के खिलाफ वह लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। 18 जून 2016 को फरहा फैज ट्रेन से दिल्ली से सहारनपुर आ रही थी। रास्ते में दो व्यक्तियों ने उसके साथ अभद्रता और मारपीट की। पीड़िता ने जीआरपी सहारनपुर में इस मामले में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। सहारनपुर जीआरपी ने घटनास्थल दिल्ली का बताकर जांच स्थानांतरित कर दी थी।
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हमलावरों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में महिला अधिवक्ता फरहा फैज ने सात दिसंबर 2017 को तीस हजारी कोर्ट में अर्जी दायर की। मेट्रोपोलियन जज ने 22 दिसंबर तक दिल्ली पुलिस को हमलावरों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसी बीच महिला अधिवक्ता ने एक हमलावर को देवबंद स्टेशन पर घूमते हुए पहचान लिया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की जांच देवबंद की तरफ घूम गई। हमले में दारुल उलूम के छात्रों के शामिल होने का शक जताया गया है। दिल्ली पुलिस दारुल उलूम तो आई, मगर खाली हाथ ही लौट गई।
इसी बीच दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर परवेज अहमद ने इसी साल 28 मार्च को अदालत में हलफनामा दिया कि दारुल उलूम में करीब 30 हजार छात्र हैं, जिनमें से हमलावरों की पहचान करना संभव नहीं हो रहा है। अदालत ने इस तर्क को दरकिनार करते हुए विवेचक को हमलावरों की पहचान के निर्देश दिए। हमलावरों के स्केच भी जारी करने के आदेश दिए। पीड़ित महिला अधिवक्ता ने सहारनपुर के डीआईजी शरद सचान से मिलकर सहारनपुर पुलिस के सहयोग न करने पर आपत्ति जताई। दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर शिवचरण मीणा ने 25 अप्रैल को दारुल उलूम पहुंचकर हमलावरों के स्केच उपलब्ध कराए हैं। दारुल उलूम के मोहतमिम के नाम एक पत्र भी दिया, जिसे असजद अली की तरफ से रिसीव किया है।
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मोहतमिम बोले, जायज नहीं है शक
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी बनारसी ने बताया कि अधिवक्ता फरहा फैज ने दिल्ली पुलिस को जो स्केच बनवाए हैं। उसमें दो लोगों को दाढ़ी और टोपी पहने दिखाया गया है। पुलिस को ख्याल है कि वो दारुल उलूम के छात्र हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि महिला अधिवक्ता पर हमला निंदनीय है। उनका मानना है कि दारुल उलूम के छात्र अमन पसंद हैं। वो किसी पर हमला नहीं कर सकते हैं। स्केच की बुनियाद पर दारुल उलूम के बच्चों को निशाना बनाया जाना न्यायोचित नहीं हैं।
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एक अप्रैल को सहारनपुर में मिली धमकी
महिला अधिवक्ता फरहा फैज को एक अप्रैल को भी मोटर साइकिल पर दो आए युवकों ने आतंकित किया। यही नहीं तीन तलाक से जुड़े मामलों की पैरोकारी करने की धमकी दी। उस समय भाई नदीम भी साथ था। इस मामले में सहारनपुर के कुतुबशेर थाने में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
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ट्रेन में हमला करने वाले दारुल उलूम के छात्र हैं। दारुल प्रशासन को प्रत्येक स्टूडेंट का वेरीफिकेशन कराया जाना चाहिए। दारुल उलूम औरतों को इज्जत देता है। इसलिए उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि हमला करने वालों को भारतीय कानून के तहत सजा मिलनी चाहिए। हमलावरों के दंडित होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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-फरहा फैज, अधिवक्ता सु्प्रीम कोर्ट
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महिला अधिवक्ता से जुड़े प्रकरण को लेकर दिल्ली पुलिस द्वारा किसी तरह का संपर्क नहीं साधा गया है। पुलिस यदि किसी तरह की मदद मांगेगी तो कानून के दायरे में उनकी हर संभव मदद की जाएगी।
बबलू कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
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