चकबंदी अफसरों को बचाने में किया जांच रिपोर्ट में खेल
चिलकाना (सहारनपुर)। चकबंदी मामले में जांच कर रहे क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर ने आरोपियों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट में ही हेराफेरी कर दी। इस पर अपर सिविल जज प्रथम ने एसएसपी सहारनपुर को एक माह के अंदर जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर अवगत कराने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही 23 अगस्त को आरोपियों को अदालत में पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
थाना चिलकाना के गांव गाजदीनपुर में 20 वर्ष पहले 1997 में शुरू हुई चकबंदी प्रक्रिया हुई थी। आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने चकबंदी अधिकारियों से मिलीभगत कर और रिश्वत देकर रामपाल तथा रामधन सहित अन्य की 19 बीघा जमीन अपने नाम करा ली थी। रामधन तथा रामपाल की जमीन को यमुना नदी में बता दिया था। पीड़ितों ने पहले विभाग में न्याय की गुहार लगाई। लेकिन विभाग के कार्रवाई न करने पर अदालत की शरण ली। इस मामले में सीजेएम कोर्ट ने चकबंदी विभाग के आठ अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी से फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पीड़ित पक्ष से रिश्वत मांगने सहित विभिन्न धाराओं 119, 120बी, 166, 406, 418, 420, 467, 468 तथा 471 में नवंबर 2014 में थाना चिलकाना में मुकदमा पंजीकृत कराया था।
इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर बिजेंद्र सिंह को सौंपी गई थी। आरोप है कि जांच अधिकारी ने चकबंदी अधिकारियों तथा दूसरे पक्ष से सांठगांठ कर 18 फरवरी 2015 को फाइनल रिपोर्ट लगा दी जबकि वादियों को न्याय दिलाने का झूठा आश्वासन देता रहा। इसके चलते रामपाल और रामधन ने अपर सिविल जज प्रथम की अदालत में जांच अधिकारी की रिपोर्ट के खिलाफ न्याय की गुहार लगाई। अपर सिविल जज सीनियर डिविजन महेश चंद वर्मा ने 26 जून 2017 को जांच अधिकारी की ओर से 18 फरवरी 2015 को दी जांच आख्या निरस्त कर दी। इस मामले में एसएसपी को एक माह में जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने और आरोपियों को 23 अगस्त को कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए। बता दें कि इस प्रकरण में तत्कालीन चकबंदी अधिकारी गंगोह मताबर सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी श्याम सिंह, चकबंदी अधिकारी नागल पूरणचंद, चकबंदी अधिकारी सदर अजब सिंह, बंदोबस्त अधिकारी चेतराम, चकबंदीकर्ता जनरैल सिंह, चकबंदी लेखपाल देवेंद्र, हल्का लेखपाल सुरेश आरोपी रहे हैं।