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Saharanpur News: ठंड में दहक रहे श्मशान घाट, हर दिन दम तोड़ रहीं आठ जिंदगी

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- 41 दिन में जलीं 300 से अधिक चिताएं, अधिकांश मृतकों की उम्र 50 साल से अधिक रही
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- रिकॉर्ड तोड़ सर्दी पड़ रही बुजुर्गों की जान पर भारी, महानगर में हैं चार प्रमुख श्मशान घाट
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। सर्द मौसम है, लेकिन श्मशान घाट दहक रहे हैं। सर्दियों में मौत का आंकड़ा काफी बढ़ गया है। महानगर के चार प्रमुख श्मशान घाटों में एक दिसंबर से 10 जनवरी तक 300 से अधिक चिताएं जलीं। यानी औसतन एक दिन में आठ जिंदगी दम तोड़ रहीं हैं। इनमें अधिकांश मृतकों की उम्र 50 साल से अधिक रही, जिसकी वजह सर्दी मानी जा रही है।

महानगर में चार प्रमुख श्मशान घाट हैं। इनमें हकीकत नगर, नुमाइश कैंप, अंबाला रोड और बाबा लालदास रोड का है। दिसंबर से सर्दी का सितम बढ़ रहा है। सर्दी में किसी की हार्ट अटैक, हार्ट फेल या फिर बीमारी की वजह से जान जा रही है। हकीकत नगर में शिव भूमि श्मशान घाट समिति अध्यक्ष महेंद्र तनेजा के मुताबिक दिसंबर में 80 अंतिम संस्कार हुए थे। जनवरी में अब तक संख्या 35 तक पहुंच गई है। जितनी भी चिताएं जलीं, उनमें अधिकांश मृतक 50 साल से अधिक उम्र के रहे। अंबाला रोड पर श्मशान भूमि एवं सुधार समिति के उपाध्यक्ष अशोक मदान ने बताया कि दिसंबर में 52 और जनवरी में अब तक 35 चिताएं जलीं हैं। इनमें बुजुर्गों के अलावा युवा भी शामिल हैं।
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यहीं हाल नुमाइश कैंप और बाबा लालदास रोड स्थित श्मशान घाट का है। इन दोनों में करीब 125 चिताएं जलीं हैं। यह केवल महानगर के प्रमुख चार श्मशान घाटों का आंकड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे श्मशान में जलीं चिताएं अलग हैं।
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गर्म मौसम में एक श्मशान घाट में हर महीने जलती थीं 20 से 25 चिताएं

गर्मियों में हर महीने एक श्मशान घाट में औसतन 20 से 25 चिताएं जलती थी, जो अब एक महीने में 70 से 80 के बीच पहुंच गया है। चिकित्सकों का मानना है कि सर्दियों में बुजुर्गों का दम फूलता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और उच्च रक्तचाप से हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सर्दी में धमनियां सिकुड़ने से दिल का दौरा, स्ट्रोक की आशंका रहती है। इसलिए बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
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