सहारनपुर। कोडीनयुक्त कफ सिरप, नारकोटिक्स श्रेणी और नकली दवाओं के बढ़ते कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए औषधि विभाग की ओर से थोक ड्रग लाइसेंसों का सत्यापन किया जा रहा है। अब तक 160 लाइसेंस की जांच हो गई है, जिसमें एक सक्रिय लाइसेंस पर दुकान बंद मिली है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए थोक ड्रग लाइसेंस जारी होंगे।
जिले में 1964 थोक ड्रग लाइसेंसधारी हैं। महानगर में किशनपुरा थोक की दवा का सबसे बड़ा बाजार है। यहां से स्थानीय स्तर के साथ ही मुजफ्फरनगर, शामली, यमुनानगर, हरिद्वार, रुड़की सहित कई जिलों में दवा की सप्लाई होती है। महीने में करोड़ों का टर्नओवर है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने निर्देश जारी किए थे कि सभी थोक दवा विक्रेताओं के लाइसेंस का व्यापक सत्यापन किया जाए।
सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी नए थोक दवा लाइसेंस को मंजूरी नहीं दी जाए। इसी कड़ी में औषधि प्रशासन विभाग ने थोक ड्रग लाइसेंसों की सत्यापन शुरू कर दिया है। अब तक 160 थोक ड्रग लाइसेंसों की जांच कर ली गई है। इसमें से देवबंद में केवल एक ड्रग लाइसेंस ऐसा मिला है, जो सक्रिय था, लेकिन दुकान बंद चलती मिली। अब विभाग ने उसके लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जिले में थोक ड्रग लाइसेंसों का सत्यापन चल रहा है। 160 लाइसेंसों की जांच पूरी कर ली गई है। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नए थोक ड्रग लाइसेंस जारी किए जाएंगे।
- कपिल शर्मा, औषधि निरीक्षक