सहारनपुर। पेयजल की लाइनों की लीकेज मरम्मत पर नगर निगम पानी की तरह पैसा बहा रहा है। जानकर हैरानी होगी कि प्रतिदिन लीकेज मरम्मत पर दो लाख रुपये से अधिक, महीने में 60 लाख और साल में सात करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। फिर भी लीकेज बंद नहीं हो रहे।
महानगर के 70 वार्डों में नगर निगम पेयजल आपूर्ति कराता है। इसके लिए ओवरहेड टैंक, बड़े और छोटे नलकूप लगाए गए हैं, जिससे प्रत्येक घर तक नियमित रूप से पानी पहुंचे, लेकिन पेयजल लाइनों में लीकेज बड़ी समस्या रही है। यह स्थिति तब है जब नगर निगम प्रत्येक वर्ष करीब सात करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। वहीं वर्ष 2024 का जलकल अनुभाग का अनुमानित व्यय ही 35.20 करोड़ है।
जलकल अनुभाग के कुल बजट का करीब पांचवां हिस्सा लीकेज पर खर्च होता है। लीकेज पर इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद मरम्मत की निगरानी केवल फोन पर की जाती है। ठेकेदार के मजदूर लीकेज मरम्मत के बाद फोटो खींचकर ग्रुप पर भेजते हैं, जिसके आधार पर भुगतान हो जाता है। संबंधित अवर अभियंता ज्यादातर जगहों पर जाकर लीकेज मरम्मत नहीं देखते हैं। यही वजह है कि खराब गुणवत्ता की सामग्री लगा दी जाती है, जिसकी वजह से लीकेज मरम्मत में लगाए जाने वाले डी-ज्वाइंट तक फट जाते हैं।
पेयजल व्यवस्था एक नजर में
महानगर में कुल ओवरहेड टैंक-22
बड़े नलकूप-126
छोटे नलकूप-117
पाइपलाइनों की लंबाई-870 किलोमीटर
कनेक्शन-2.13 लाख
लीकेज मरम्मत में किस गुणवत्ता का सामान लगना है यह टेंडर की शर्तों में शामिल है। यदि कोई खराब गुणवत्ता की सामग्री लगा रहा है तो जांच कराई जाएगी। अवर अभियंताओं को मौके पर भेजा जाता रहा है। सर्दियों में पाइप सिकुड़ने की वजह से लीकेज की समस्या बढ़ जाती है।
- पुरुषोत्तम कुमार, महाप्रबंधक, जलकल अनुभाग