सहारनपुर। खेल को अपना करियर बनाने वाले कोच आज कोरोना के वार से बेजार हैं। मार्च 2020 से अब तक अधिकांश कोच घर बैठे हैं। मजबूरी में खेती करनी पड़ रही है तो कोई मजदूरी कर रहा है। यह हाल उनका है, जिन्होंने खुद भी राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीते तो प्रशिक्षण देकर ऐसी खेल प्रतिभाएं तराशी जो राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक बटोरकर चमकी हैं। पेश है सहारनपुर मंडल के तीनों जिले के कोच की स्थिति पर रिपोट...
जोड़ी हुई रकम खत्म, अब उधार से गुजारा
डाक्टर भीमराव आंबेडकर स्पोटर्स स्टेडियम में लाल धर्मेंद्र 2001 से एथलेटिक्स कोच हैं। इन्होंने राष्ट्रीय पदक जीते हैं और इनसे प्रशिक्षण पाने वाले कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। इनमें डिस्कस थ्रो में अंकुश पुंडीर, लंबी कूद में सुमित और पैदल चाल में प्रिंस कुमार ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते हैं। सहारनपुर में गुरुद्वारा रोड पर रहने वाले लाल धमेंद्र के परिवार में पत्नी और मां के अलावा दो बेटियां हैं। जिनमें बड़ी बेटी बीमार रहती है। धर्मेंद्र बताते हैं कि जोड़ा हुआ धन खर्च हो गया है, अब तो उधार लेकर ही गुजारा हो रहा है।
गांव में भेज दिए पत्नी और बच्चे
डाक्टर भीमराव आंबेडकर स्पोटर्स स्टेडियम में कबड्डी कोच संजीव कुमार मूलरूप से शामली जिले के गांव बंतीखेडा के रहने वाले हैं। इनका कहना है कि स्टेडियम के एक हिस्से में चारपाई डाल रखी है। मानदेय डेढ़ साल से नहीं मिला। पत्नी के अलावा 13 साल की बेटी और 10 वर्षीय बेटे को गांव भेज दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीता है, दो प्रतियोगिता में सिल्वर है। छह बार राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग किया। उनके अंडर में कोचिंग लेने वाला मोन्टी राष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर मेडल विजेता हैं।
शिष्य की दुकान पर करना पड़ा काम
मुजफ्फरनगर स्टेडियम में वुशु कोच मनीष शर्मा जाट कालोनी में रहते हैं। वह 2003 साउथ एशियन खेले हैं। सीनियर नेशनल मेडलिस्ट हैं और 10 मेडल राष्ट्रीय स्तर पर जीते हैं। 2007 से कोच रहे हैं। करीब 25 हजार मानदेय मिलता था, लेकिन कोरोना काल में यह आमदनी छिन गई। कोरोना कर्फ्यू से पहले तक सरकुलर रोड पर अपने शिष्य की पिज्जा की दुकान पर बतौर मैनेजर काम किया।
- नागल क्षेत्र के गांव धर्मपुर सरावगी निवासी जयेंद्र सहारनपुर के डाक्टर भीमराव आंबेडकर स्पोटर्स स्टेडियम में 2017 से भारोत्तलन के कोच हैं। 20 हजार रुपये प्रति माह मिलता था। कोरोना की वजह से घर बैठे हैं। इस कारण खेती संभाल रहे हैं। वह तीन जूनियर नेशनल और तीन सीनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं। चार बार यूपी चैंपियन भी बने हैं।
राजमिस्त्री के साथ मजदूरी कर रहे शमी
रामपुर मनिहारान निवासी मोहम्मद शमी मार्शल आर्ट के कोच हैं। कोरोना काल में रोजगार छिनने की वजह से अब अपने घर का खर्च चलाने के लिए राजमिस्त्री के पास मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि संघ के सचिव हैदर चौधरी ने उनकी स्थिति की देखते हुए कई बार मदद की है।
वर्जन
कोचों के नवीनीकरण के लिए तीन महीना पूर्व प्रक्रिया शुरू हुई थी। कोरोना संक्रमण बढ़ने पर प्रक्रिया लंबित हो गई। अब फिर से प्रक्रिया होगी और नवीनीकरण होने पर कोच अपने काम पर लौट सकेंगे। -- प्रेम कुमार, प्रभारी क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी