सहारनपुर। कोरोना संक्रमण ने विदेशियों को हिंदुस्तानी आम का स्वाद चखने से मोहताज कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हुईं तो आम के निर्यात पर भी ब्रेक लग गया। हाल ही में मुंबई की एक फर्म को 10 टन अल्फांसो आम लंदन भेजना था, लेकिन संक्रमण की वजह से आम भिजवाया नहीं जा सका और ऑर्डर निरस्त हो गया।
विश्व के कई देशों में अपने स्वाद एवं खुशबू के चलते भारतीय आम बहुत पसंद किया जाता है। मंडी परिसर स्थित मैंगो पैक हाउस से हर वर्ष बड़ी मात्रा में आम को प्रोसेस कर विदेश भेजा जाता है। इसमें अल्फांसो और केसर प्रजाति का आम महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से भी प्रोसेसिंग के लिए सहारनपुर के मैंगो पैक हाउस में आता है। इसके अलावा सहारनपुर जनपद का दशहरी, चौसा और लंगड़ा आम का भी कई देशों में निर्यात होता है। अमेरिका, यूके, जापान, आस्ट्रेलिया, स्वीडन, उजबेकिस्तान, फ्रांस, इटली, कोरिया, नेपाल, यूएई सहित अन्य कई देशों में भारतीय आम की खासी मांग रहती है। इससे आम निर्यातकों को अच्छा मुनाफा भी होता है।
ये है प्रोसेसिंग की प्रक्रिया
मैंगो पैक हाउस में आम को सबसे पहले साफ पानी से धोकर साफ किया जाता है, फिर इसकी ग्रेडिंग होती है। इसके बाद आम को वीएचटी (वेपर हीट ट्रीटमेंट) से गुजारा जाता है। इससे आम को बैक्टीरयिा, फंगस या वायरस आदि के प्रकोप से मुक्त किया जाता है। इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद आम निर्यात के लिए तैयार होता है।
विदेशियों को भाती हैं ये प्रजातियां
आम की यूूं तो सभी प्रजातियां अपनी खूबियों के कारण पसंद की जाती हैं, लेकिन विदेशियों को इनमें से कई प्रजातियां अधिक भाती हैं। इनमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा, अल्फांसो, केसर, राजापुरी और कलमी शामिल हैं।
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मैंगो पैक हाउस से प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में आम की प्रोसेसिंग कर निर्यात किया जाता है। हाल ही में लंदन की फर्म के लिए 10 टन आम का निर्यात होना था। इसके लिए निर्यातक ने महाराष्ट्र से अल्फांसो आम को मंगाने की तैयारी कर ली थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते फ्लाइट स्थगित हो गई। जिससे ऑर्डर कैंसिल करना पड़ा। कोरोना प्रकोप समाप्त होने के बाद नए निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना है।
-- अशोक कुमार गुप्ता, मंडी सचिव।
जनपद से आम का निर्यात --
वर्ष -------- मात्रा (किलो में)
2018 ------- 3,61,595
2019 ------- 7,27,895
2020 ------- 2,68,001
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नोट: मंडी समिति के आंकड़ों के अनुसार।