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कोरोना ने फीकी कर दी ईद की त्यौहारी

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सहारनपुर। कोरोना ने ईद की मिठास फीकी कर दी है। मेवों, कपड़ों और जूतों के कारोबार में गिरावट है। सामान्य हालात में कपड़ों, मेवों और जूतों का करीब 20 करोड़ का कारोबार होता था, लेकिन अब कारोबारी 30 फीसदी ही रह गया है।
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चांद के दीदार के हिसाब से ईद-उल-फितर 13 या 14 मई को होगी। कोरोना संक्रमण की वजह बाजार बंद है। सुबह के समय आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खुल रही हैं। कोरोना की वजह से प्रभावित हुए कारोबार के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है, जिसका असर ईद के त्योहार भी पड़ा है। नखासा बाजार के मेवों थोक कारोबारी वक्कार अहमद और पुल कंबोहान के कारोबारी हाजी हमशेद ने बताया कि ईद के मौके पर सामान्य हालात में मेवों का कारोबार आठ से दस करोड़ रुपये का जिले भर होता था, लेकिन बीते वर्ष भी ईद पर बाजार में मंदा रहा और इस बार भी काम नहीं है।
कपड़ा कारोबारी राधे श्याम नारंग का कहना है कि बाजार खुल नहीं रहे हैं, इस वजह से लोग खरीदारी नहीं कर पा रहे हैं। ईद पर कारोबार जिले भर में 10 करोड़ से अधिक का होता था। मगर, इस बार कारोबार घटकर 30 फीसदी रह गया है। इसी तरह जूता कारोबार भी भारी गिरावट है।
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इत्र की महक भी हुई कम
सहारनपुर। ईद पर इत्र कारोबार भी खूब होता था। मगर, कोरोना की वजह से इत्र की महक भी कम हो गई है। दावतुल मुस्लमीन के संरक्षक कारी इश्हाक गोरा का कहना है कि ईद और रमजान या फिर सामान्य दिनों में भी इत्र लगाकर खुदा की इबादत करने से रूहानियत पैदा होती है। इसे एक तरह से सुन्नत भी माना गया है। नया बाजार के इत्र कारोबारी रमेश छाबड़ा का कहना है कि इत्र कारोबार भी कोरोना की वजह से बेहद कम रह गया है। इत्र की मांग घट गई है।
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मेवा दाम प्रति किलोग्राम
बादाम 540
काजू 600
छुआरा 180
किशमिश 240
अखरोट 600
पिस्ता 970
मखाने 540
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