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कोरोना का प्रभाव, वुड कॉर्विंग का घटा निर्यात

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रोहिणी मारवाह - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कोरोना की वजह से कारोबार और व्यापार पर वर्ष 2020 बेहद खराब गुजरा। पहले लॉकडाउन में कारोबार ठप रहा तो, अनलॉक में भी तेजी नहीं पकड़ पाया। त्योहारी सीजन में जरूर कारोबार की स्थिति बेहतर रही। विश्वविख्यात वुड कॉर्विंग कारोबार में ही करीब 40 प्रतिशत की गिरावट आई। होजरी के साथ ही अन्य कारोबार बुरी तरह प्रभावित रहे। वाहनों की भी बिक्री ठप रही। तीन महीने तक 35000 से ज्यादा रेहड़ी पटरी वालों का व्यापार ठप रहा। हालांकि लोगों ने घरों से व्यापार शुरू किए तो नए स्टार्टअप भी लगे। वहीं, त्योहारी सीजन में कारोबार कुछ चमका जरूर, लेकिन यह साल बुरा बीता। अब नए साल से कारोबारियों को काफी उम्मीदें हैं। पेश है रिपोर्ट...
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श्रमिकों के पलायन से बढ़ी रही परेशानी
लॉकडाउन में न सिर्फ उद्योग और व्यापार बंद रहे बल्कि श्रमिकों को भी पलायन करना पड़ा। हरियाणा, पंजाब, गुजरात से रॉ मैटीरियल के तौर पर कॉटन होजरी कारोबारी मंगाते हैं, इसके दाम में तेजी आने से होजरी कारोबार प्रभावित रहा। अनलॉक में भी उद्योगों में श्रमिकों की कमी खलती रही। वहीं, ट्रेनें बंद होने से रेडीमेड गारमेंट्स और अन्य कारोबार में भारी गिरावट आई, क्योंकि बाहर से माल नहीं आने पर दिक्कत बनी रही। चीन से संबंध खराब चलने के दौरान मोबाइल एसेसरीज के उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित रही।
वर्चुअल मेले रहे मददगार
अनलॉक के बाद वुड कॉर्विंग उद्योग दोबारा से रफ्तार पकड़ी। सरकार की ओर से कराए गए वर्चुअल मेले से भी वुड कॉर्विंग उत्पादों के निर्यात के लिए कई आर्डर मिले तो, हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद की तरफ से कराए गए वर्चुअल मेले का भी काफी लाभ मिला। हालांकि यूरोप के देशों में कोरोना की दूसरी लहर से एक बार फिर वुड कॉर्विंग उद्योग प्रभावित हो रहा है।
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कलस्टर और सीएफसी की मिली सौगात
वुड कॉर्विंग का कलस्टर बनाने को पिलखनी में 250 बीघा जगह चिह्नित हुई और बैनामों की प्रक्रिया शुरू कराई गई। करीब 100 बीघा जमीन के बैनामे हो भी गए। इसी जगह रॉ मैटीरियल बैंक की स्थापना का रास्ता साफ हुआ और देहरादून से एफआरआई (फारेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट) की टीम ने सर्वे भी किया, साथ ही बांस उत्पादों का प्रशिक्षण दिलाने के लिए बेहट में सीएफसी (कॉमन फेसिलिटी सेंटर) बना।
आत्मनिर्भर बनने में सहारा बनीं योजनाएं
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजनाएं भी कोरोना काल में मददगार साबित हुईं। उद्योग विभाग के उपायुक्त सिद्धार्थ यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के लिए लक्ष्य 57 यूनिट का था, जबकि 152 यूनिटों को स्वीकृति मिली। 75 यूनिटों के लिए ऋण मिल चुका है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 84 यूनिटों के लक्ष्य में से 57 यूनिटों के लिए स्वीकृति हुई और 31 यूनिटों को ऋण वितरण हो चुका है। ओडीओपी योजना में 104 लक्ष्य के सापेक्ष 60 यूनिटों के लिए स्वीकृति मिली। इनमें से 30 को ऋण उपलब्ध हो चुका है।
स्वरोजगार के साथ दिया दूसरों को भी रोजगार
- गांव शेखपुरा कदीम निवासी फतिमा ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से ऋण लेकर कोरोना काल में रेडीमेड गारमेंट का व्यवसाय शुरू किया। पहले वे लड़कियों को सिलाई सिखातीं थीं। अब बच्चों की ड्रेस तैयार करके बेचती हैं। उन्होंने दो अन्य लड़कियों को भी रोजगार दे रखा है।
- मीरकोट निवासी रोहिनी मारवाह ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का लाभ उठाकर कोरोना काल में होजरी का व्यवसाय शुरू किया। जब लोगों के सामने रोजगार का संकट था उस समय 10 से 12 लोगों को भी रोजगार दिया। अब लोवर और टी शर्ट तैयार कर स्थानीय बाजार में बेचकर परिवार की आमदनी बढ़ा रहीं हैं।
उद्यमियों की बातें
- कोरोना काल में वुड कॉर्विंग उद्योग को करीब 40 प्रतिशत का नुकसान हुआ। अनलॉक के बाद 20 फीसदी की रिकवरी हो पाई। आने वाले वर्षों में निर्यात बढ़ने की संभावना है। इससे वुड कॉर्विंग उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा। -- रामजी सुनेजा, निर्यातक एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आईआईए।
- यह साल कोरोना की वजह से कारोबार के लिए बुरा गुजरा। हालांकि वुड कॉर्विंग कलस्टर के लिए जमीन की खरीद होने और सीएफसी का निर्माण इस साल की सौगात में मिली सौगात माना जाएगा। -- औसाफ गुड्डू, वुड कॉर्विंग निर्यातक

ओसाफ गुडडू- फोटो : SAHARANPUR

फातिमा- फोटो : SAHARANPUR

रामजी सुनेजा- फोटो : SAHARANPUR

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