सहारनपुर। वैश्विक महामारी कोरोना ने स्कूल यूनिफार्म कारोबार का दम निकाल दिया है। स्कूल खुल नहीं पाए तो, बच्चों के लिए यूनिफार्म की खरीदारी भी नहीं हुई। जबकि यूनिफार्म कारोबारी स्कूल खुलने से कई महीना पहले ही ड्रेस में शामिल सामान का स्टाक करा लेते हैं। एक अनुमान के तौर पर करीब 50 लाख रुपये का झटका कोरोना काल में यूनिफॉर्म कारोबारियों को लगा है।
शहर में यूनिफार्म के करीब 15 कारोबारी और व्यापारी हैं, इनमें कुछ अपने यहां यूनिफॉर्म तैयार कराते हैं तो, कुछ तैयार यूनिफार्म खरीदकर अपनी दुकानों पर बिक्री करते हैं। इनके अलावा हौजरी कारोबारी भी स्कूलों की ड्रेस के मुताबिक जुराब, ट्रेक शूट आदि तैयार कराते हैं, जिसकी सप्लाई स्कूल खुलने से पहले ही शुरू हो जाती है। हर साल की तरह ही इस बार भी कारोबारियों ने स्कूल यूनिफार्म दिसंबर के बाद से ही तैयार करानी शुरू कर दी थी, लेकिन मार्च में लॉकडाउन लग गया। इसके बाद अब तक स्कूल नहीं खुल पाए हैं। ऐसे में मार्च माह तक कारोबारियों के पास जो माल स्टाक में था, वह दुकानों में ही रखा है। उसकी बिक्री नहीं हो पाई है।
हर स्कूल की अलग यूनिफार्म
शहर में 20 से ज्यादा प्रमुख प्राइवेट स्कूल हैं। प्रत्येक स्कूल में बच्चों की संख्या दो हजार से ज्यादा है। हर स्कूल में यूनिफार्म अलग रंग और डिजाइन की है। उस लिहाज से यूनिफार्म विक्रेताओं को अलग-अलग स्कूल के ड्रेस कोड को ध्यान में रखते हुए कपड़ा मंगाकर यूनिफार्म तैयार करानी पड़ती है।
व्यापारियों की पीड़ा
कोर्ट रोड पर सताक्षी यूनिफार्म के संचालक रमेश गंभीर का कहना है कि कोरोना महामारी ने सब चौपट कर दिया है। नवंबर-दिसंबर में सर्दी का सीजन खत्म होने पर गर्मी के हिसाब से स्कूल यूनिफार्म तैयार कराई थी। वैसे तो हर स्कूल की अलग यूनिफार्म है, लेकिन जिन स्कूलों में सफेद शर्ट लगती हैं, वहां के लिए बड़ी संख्या में सफेद शर्ट अलग-अलग साइज में तैयार करा ली गई थी। इसके अलावा शूज, टाई, जुराब, बेल्ट, ट्रैक शूट आदि भी मंगा लिए थे। करीब 10 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो गया है। उधर, शहीद गंज में गाबा यूनिफार्म के संचालक तरनप्रीत सिंह का कहना है कि जब स्कूल खुले ही नहीं तो, यूनिफार्म कौन खरीदता। यूनिफार्म के सभी कारोबारियों को मोटा नुकसान उठाना पड़ा है।