मवीखुर्द स्थित पोली हाउस में जरबेरा फूल को डम्प करने जाते कर्मी
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सहारनपुर। कोरोना वायरस के बाद शुरू हुए लॉकडाउन ने लोगों के रोजमर्रा के जीवन के साथ ही खेेती को भी प्रभावित किया है। इसके चलते जनपद के करीब 50 पॉलीहाउस में लाखों के फूल बर्बाद हो रहे हैं। यहां से प्रतिदिन लाखों रूपये के जरबेरा और गुलाब सहित अन्य फूल दिल्ली, चंडीगढ़, देहरादून सहित अन्य मंडियों में बिकने के लिए जाते हैं। कोरोना इफेक्ट के चलते पॉलीहाउस स्वामियों को खासा घाटा उठाना पड रहा है। इससे उन्हें रोजमर्रा के खर्च से लेकर ईएमआई देने की चिंता सता रही है।
ये बोले किसान
गांव मवी खुर्द स्थित एक पॉलीहाउस में जरबेरा की खेती कर रहे किसान राजेश पंवार और मोहित पंवार ने बताया कि वे कोराना संकट के बाद से करीब तीन लाख से अधिक जरबेरा के फूल मंडी में नहीं बेच पाए। दिल्ली की गाजीपुर मंडी में जरबेरा की सप्लाई करने वाले इन किसानों को प्रति फूल तीन रूपये मिलते थे।
गांव नैनसोब स्थित पॉलीहाउस में गुलाब और जरबेरा की खेती करने वाले कार्तिकेय त्यागी ने बताया कि उनके यहां से हर दूसरे दिन पांच हजार फूल गुलाब और इतने ही जरबेरा के फूल तैयार हो जाते हैं। एक व्यापारी पॉलीहाउस से ही औसतन तीन रूपये प्रति जरबेरा और पांच रूपये प्रति गुलाब का फूल खरीदता है।
जनपद में करीब 50 पॉलीहाउस में फूलों की खेती होती है। कोराना वायरस के प्रकोप के बाद शुुरू हुए लॉकडाउन के चलते किसान अपने फूल बेच नहीं पा रहे हैं। तैयार फूलों को तोड़कर उन्हें डंप किया जा रहा है। इससे उनको जहां आमदनी बंद हो गई है, वहीं फूलों केे तोड़कर डंप करने का खर्च भी बढ़ गया है।
- अरुण कुमार, जिला उद्यान अधिकारी।
मवीखुर्द स्थित पोली हाउस में जरबेरा फूल- फोटो : SAHARANPUR