सहारनपुर में हिंदू जुलाहा जाति को कोरी जाति में बताकर अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र बनवाकर ग्राम प्रधान बने तीन प्रधानों एवं एक जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी खतरे में पड़ गई है।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने हिंदू जुलाहा को कोरी जाति में न मानते हुए पांच लोगों के जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिए हैं। जिससे इनकी प्रधानी और सदस्यता जा सकती है।
ग्राम पंचायत एवं जिला पंचायत सदस्य के चुनावों में हिंदू जुलाहा जाति के लोगों ने अपने को कोरी जाति में दिखाकर अनुसूचित जाति के प्रमाण-पत्र बनवा लिए और चुनाव जीत गए।
इनमें वार्ड 35 के जिला पंचायत सदस्य ग्राम दुहारकी निवासी अनिल कुमार, ग्राम बोंसा के प्रधान विनोद कुमार, ग्राम पिलखनी के प्रधान बल सिंह, ग्राम महजबता की प्रधान मोनिका रानी तथा मेडिकल कॉलेज का तृतीय वर्ष का छात्र ग्राम साल्हापुर निवासी सचिन कुमार शामिल हैं।
जिला पंचायत सदस्य अनिल कुमार के खिलाफ संविधान बचाओ समिति के संरक्षक मंडल के सदस्य राजकुमार ने शिकायत की। राजकुमार का आरोप है कि उन्होंने चुनाव के समय ही इन लोगों पर गलत जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के मामले को लेकर पर आपत्ति दाखिल की थी
लेकिन सहायक निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन एवं चुनाव आयुक्त ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। बाद में ये सभी लोग जीत गए थे। इसके बाद इनके जाति प्रमाण-पत्र को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जाति प्रमाण पत्र स्क्रूटनी कमेटी में चुनौती दी गई।
स्क्रूटनी कमेटी की बैठक जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 4 जून 2016 को हुई। जिसमें दोनों पक्षों की सुनवाई की गई। आरोप है कि अनिल कुमार अपनी जाति के अनुसूचित जाति में होने का कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सके।
कमेटी ने अपने आदेश में उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वारा एक जनहित याचिका में सोनू बावरा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में दिए गए निर्णय का हवाला दिया।
जिसमें उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार संशोधन करने का अधिकार संसद एवं राष्ट्रपति को है। किसी प्रशासनिक आदेश से अनुसूचित जाति की सूची में कोई रद्दोबल नहीं हो सकता। इससे स्पष्ट है कि अनुसूचित जाति का लाभ सर्फ कोरी जाति को ही मिलेगा।
कमेटी ने इसके आधार पर रामपुर मनिहारन के वार्ड 35 के जिला पंचायत सदस्य अनिल कुमार का जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया है। इसके अलावा ग्राम पिलखनी निवासी सचिन कुमार सोनी की शिकायत पर ग्राम बोंसा के प्रधान विनोद कुमार का भी जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया गया है।
पिलखनी के ओमवीर की आपत्ति पर प्रधान बल सिंह का और महजबता के चंद्रप्रकाश की शिकायत पर प्रधान मोनिका रानी का जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया है।
इसके अलावा साल्हापुर के विक्रम सिंह की शिकायत पर नकुड़ के सचिन कुमार का जाति प्रमाण-पत्र भी निरस्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह मेडिकल का तृतीय वर्ष का छात्र है।
डीएम पवन कुमार का कहना है कि पांच लोगों के जाति प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिए गए हैं। हिंदू जुलाहा जाति को अनुसूचित जाति में नहीं माना गया है। आगे की कार्रवाई चुनाव आयोग के निर्देशानुसार की जाएगी।
हिंदू जुलाहा जाति को अनुसूचित जाति में न माने जाने पर तीन ग्राम प्रधानों एवं एक जिला पंचायत सदस्य की कुर्सी पर तलवार लटक गई है। प्रशासन अब चुनाव आयोग के निर्देश प्राप्त कर रहा है। ऐसे में इन पांचों की कुर्सी कभी भी जा सकती है।