जनमंच में आयोजित मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक के साथ छात्र छात्
सहारनपुर। राज्यपाल, कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह का मतलब दीक्षा का अंत नहीं है, बल्कि नई शिक्षा का आरंभ है। इसे दीक्षा उत्सव के रूप में देखें। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे चरित्र का निर्माण करना है, जो राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित हो। राज्यपाल ने मंगलवार को जनमंच में आयोजित मां शाकुंभरी विश्वविद्यालय के चौथे दीक्षांत समारोह को वर्चुअल संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि जो डिग्रियां डिजिटल लॉकर में प्रविष्ट की गई है, छात्र उन्हें वहां से डाउनलोड कर सकते हैं। जो छात्र पदक नहीं हासिल कर सके। वह निराश न हो। प्रतियोगिता दूसरों से नहीं बल्कि स्वयं से होती है। राज्यपाल ने कहा कि मां शाकुंभरी विवि का नाम हमारी आस्था, प्रकृति और संरक्षण का प्रतीक है। इसमें लोक कल्याण की भी भावना दिखाई देती है। छात्र इसी भावना को साथ लेकर देश और समाज हित में अपनी शिक्षा का उपयोग करें। हमारी शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य ज्ञान के साथ संस्कारवान बनाना भी है।
राज्यपाल ने देश में वृद्धाश्रम की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई। युवाओं से आह्वान किया कि माता-पिता की उपेक्षा न करें। वुड कार्विंग को लेकर कहा कि यहां की नक्काशी विश्व में प्रसिद्ध है। इसके साथ ही यहां का चीनी उद्योग, चावल, होजरी उद्योग विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्होंने युवाओं से स्थानीय रोजगार में नवाचार करते हुए उन्हें अनुसंधान से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।