पुवांरका(सहारनपुर)। थाना कोतवाली देहात के गांव पीकी में ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार में महिला की मौत के बाद ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। पंचायत में ईसाई बने परिवारों ने पुनः हिंदू धर्म में वापसी की घोषणा की, जिसके बाद ही महिला का अंतिम संस्कार हो सका।
बृहस्पतिवार रात गांव पीकी निवासी राम सिंह की पत्नी मामचंदी का निधन हो गया था। ग्रामीणों के अनुसार अनुसूचित जाति के रामसिंह के परिवार सहित गांव के ही सुनीत कुमार, सुरेन्द्र, विक्रांत, शीला व मोहित सहित 13 परिवारों के करीब 65 लोगों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था। इस पर समाज के लोगों ने उनका बहिष्कार कर दिया था। वह मामचंदी की मृत्यु के बाद उनके घर भी नहीं गए तथा गांव के श्मशान में मृतका का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि जब इन परिवारों ने ईसाई धर्म अपना लिया है तो अंतिम संस्कार भी ईसाई धर्म के अनुरूप करना चाहिए।
मामले की सूचना पर पुलिस भी गांव पहुंची। शुक्रवार को अनुसूचित समाज के लोगों की गांव के रविदास मंदिर में पंचायत हुई। काफी देर बाद 13 परिवारों में से 11 परिवारों ने पुनः हिंदू धर्म में लौटने की घोषणा की, जबकि दो परिवारों ने ईसाई धर्म छोड़ने से इन्कार कर दिया। पंचायत में फैसला लिया गया कि परिवारों के पुनः हिंदू धर्म में लौटने पर शव का अंतिम संस्कार गांव के श्मशान घाट में ही होगा। मृतका के बेटे सुरेंद्र का कहना है कि गांव के जिम्मेदार व बिरादरी के लोगों द्वारा पंचायत में आपसी सहमति बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बाकी दो परिवारों को भी समझा-बुझाकर अपने धर्म में वापसी कराई जाएगी। पंचायत में चमनलाल, शीशराम, अंकित, गोविंदा, सुशील, हरपाल, जयकुमार, जयंत, शुभम आदि रहे।
पुलिस का कहना है कि कुछ लोग आपसी नाराजगी की वजह से महिला का अंतिम संस्कार नहीं होने दे रहे थे, जिन्हें समझा दिया गया तथा महिला का अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। धर्म परिवर्तन जैसा कोई मामला नहीं है।