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पिछड़ों के सांविधानिक अधिकारों पर हो रहा कुठाराघात : पूर्व न्यायाधीश

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सहारनपुर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश इफाकत अली खान ने कहा कि वर्तमान दौर में पिछड़ों के सांविधानिक अधिकारों पर कुठाराघात हो रहा है। ऐसे में देश की न्याय पालिकाओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। पूर्व न्यायाधीश शनिवार को जनमंच सभागार में सामाजिक चेतना फाउंडेशन न्यास के तत्वावधान में आयोजित महासम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थें।
भारतीय संविधान में सामाजिक न्याय की अवधारणा विषय पर हुए महासम्मेलन में उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोग संविधान में वर्णित पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उसे लागू कराने की जिम्मेदारी लें। फाउंडेशन के संस्थापक एवं इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह यादव ने कहा कि भारत में अशिक्षा, असमानता, गरीबी जैसी कुरीतियां हैं।
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यहां पर सरकार को जनता की बुनियादी जरूरतों पर गंभीरतापूर्वक कार्य करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मुख्य वक्ता डाॅ. लक्ष्मण यादव ने कहा कि आज देश में संविधान की अवधारणा के विपरीत काम हो रहे हैं। सामाजिक न्याय की बात करने वाले लोगों पर कुठाराघात किया जाता है। आपस में न लड़कर देश के संविधान, सामाजिक न्याय को बचाना होगा।
बीपी मंडल के पौत्र प्रोफेसर सूरज मंडल ने कहा कि ओबीसी, दलितों व पिछड़ों के लिए एकजुट होकर सामाजिक न्याय के लिए सड़कों पर आंदोलन करना होगा। फाउंडेशन के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश बीडी नकवी ने कहा कि हमें भारतीय संविधान में निहित इन प्रावधानों को मजबूती के साथ धरातल पर लागू करवाने के लिए आमजन को जागरूक करना होगा।
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इस मौके पर देवमणि भारतीय, रणसिंह पोसवाल, चंद्रकिरण, रामाशीष यादव, त्रिभुवन सिंह, डीपी सिंह, नरेंद्र यादव, सतेंद्र सिंह, मनोज धनगर, शमशेर गौतम, योगेंद्र प्रताप सिंह आदि ने भी विचार रखे। संचालन राममूरत सिंह यादव ने किया।
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