सहारनपुर में समाजवादी पार्टी से गठबंधन करना कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। पहले प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के सगे भाई और अब एक और नेता ने बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है।
इतना ही नहीं, सहारनपुर नगर सीट पर जिलाध्यक्ष को टिकट देने की मांग पुरजोर तरीके से उठ रही है। ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस पार्टी से कई बड़े नेता और पदाधिकारी भी बगावत कर सकते हैं।
सपा से गठबंधन के बाद कांग्रेस के हिस्से में बेहट, नकुड़, देवबंद और रामपुर मनिहारान की सीटें आई थीं। सहारनपुर नगर सीट को लेकर पहले दिन से विवाद है। यहां कांग्रेस मसूद अख्तर को टिकट देने की मांग पर अड़ी है तो सपा से संजय गर्ग के लिए जोर लग रहा है।
जबकि बड़ी संख्या में कांग्रेसी जिलाध्यक्ष शशि वालिया को नगर सीट से टिकट देने की मांग कर रहे हैं। ऐसा न होने पर वह एक या दो दिन में बगावत भी कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, कार्यकर्ताओं का दावा है कि कुछ दिन पहले जब प्रदेशाध्यक्ष राज बब्बर सहारनपुर पहुंचे थे तो वह शशि वालिया को नगर से चुनाव लड़ाने का आश्वासन देकर गए थे और तैयारी करने को कहा था।
इसके अलावा कांग्रेस के साद अली ने भी पार्टी से टिकट न होने पर मंगलवार को सहारनपुर देहात सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।
कुछ ही दिन पहले पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष इमरान मसूद के सगे भाई सलमान मसूद नकुड़ से निर्दलीय चुुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।
इस प्रकार लगातार पार्टी नेताओं के बगावत करने से जाहिर है कि यह लोग गठबंधन से खुश नहीं हैं।
इसके अलावा कांग्रेस ने जिन लोगों को टिकटों की घोषणा की है। उससे भी पार्टी कमेटी खुश नहीं है। देवबंद सीट पर चुनाव लड़ने को लेकर भी पार्टी के भीतर घमासान मचा हुआ है। ऐसे में गठबंधन की चाल से कम से कम सहारनपुर में तो कांग्रेस का नुकसान नजर आ रहा है। प्रेस प्रवक्ता गणेश दत्त शर्मा ने भी इसकी पुष्टि की है।