कब्जों में गुम हो गया ‘कंपनी नहर’ का वजूद, सोता रहा सिंचाई विभाग
सहारनपुर। करीब 270 साल पुराने कंपनी बाग (नेताजी सुभाष चंद्र बोस उद्यान) की सिंचाई का मुख्य स्रोत रही कंपनी नहर का अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। सिंचाई विभाग भी इस नहर के वजूद को बचा नहीं सका। आलम यह है कि करीब छह किलोमीटर लंबी नहर का दो किलोमीटर से अधिक हिस्सा कब्जों से पट गया है। इस पर या तो सड़कें बना दी गईं या फिर अन्य तरह के कब्जे हो गए।
कंपनी बाग का अपना इतिहास रहा है। माना जाता है कि कंपनी बाग की स्थापना के बाद अंग्रेजी हुकूमत में इसकी सिंचाई के प्रबंध किए गए थे। इसके लिए शकलापुरी क्षेत्र से गुजरने वाली बड़ी नहर से एक माइनर निकाला गया, जिसे लोग ‘कंपनी नहर’ के नाम से जानते हैं। यह कंपनी नहर शकलापुरी मार्ग के साथ-साथ कुष्ठ आश्रम पर बेहट रोड को क्रॉस करते हुए गढ़ी मलूक के बीच और महाराज सिंह कॉलेज के पीछे से होते हुए कंपनी बाग तक आती थी। इसमें जरूरत के हिसाब से बाग की सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता था। इतना ही नहीं, नहर के आसपास के किसानों के खेतों की सिंचाई का जरिया भी यही नहर थी। मगर शहर के विस्तार के साथ-साथ नई कॉलोनियां कटती गईं और नहर का वजूद कब्जों में दफन होता गया। खास बात यह है कि विभाग या प्रशासन की ओर से नहर को बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। वर्तमान में कंपनी बाग से हनुमान कॉलोनी तक नदी पर या तो सड़कें बनी हैं या फिर लोगों ने कब्जे किए हुए हैं। शकलापुरी मार्ग पर कट रही कॉलोनियां कंपनी नहर को पाटती आ रही हैं।
सिंचाई विभाग कराता है सफाई
कंपनी नहर में पुराना कलसिया रोड मोड़ तक आज भी पानी आता है, जिससे स्थानीय किसान अपने खेतों और बागों की सिंचाई करते हैं। सिंचाई विभाग मोड़ से पीछे प्रत्येक वर्ष नहर की सफाई भी कराता है। बीते दिनों नहर की पुलियाओं का भी जीर्णोद्धार किया गया। मगर उससे आगे शहरी क्षेत्र का करीब चार किलोमीटर हिस्सा ऐसे ही छोड़ दिया गया।
वर्जन
नहरों पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होने दिया जाएगा। यदि कंपनी बाग के लिए आने वाली नहर पर कब्जा हुआ है तो जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की कमेटी बनाकर जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो कठोर कार्रवाई होगी। - संजय कुमार, कमिश्नर