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Saharanpur News: जिले के स्कूलों में आवारा कुत्तों की समिति गायब, सर्वोच्च न्यायालय का आदेश बेअसर

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सहारनपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के करीब एक साल बीतने को है, फिर भी जिले के परिषदीय स्कूलों में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए स्कूल स्तर की समितियां अभी तक नहीं बन पाई। लापरवाही के चलते करीब 1438 परिषदीय स्कूलों एवं 146 माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले डेढ़ लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा अभी भी अधर में लटका हुआ है।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की बढ़ती घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पिछले साल आदेश पारित किए थे। इनमें शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों जैसे परिसरों से आवारा कुत्तों को बंध्याकरण व टीकाकरण के बाद शेल्टर होम भेजने तथा उनकी दोबारा एंट्री रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। राज्यों को दो सप्ताह में सभी परिसर चिह्नित करने और रिपोर्ट भेजने को भी कहा गया था।
विभागीय जानकारी के अनुसार जिले के परिषदीय स्कूल स्तर पर समिति का गठन होना था, जिसमें हेडमास्टर अध्यक्ष और नोडल अधिकारी होंगे। नोडल अधिकारी का नाम व मोबाइल नंबर स्कूल के मुख्य गेट पर लिखा जाना अनिवार्य था। हेडमास्टर के लिए निर्देश थे कि स्कूल परिसर या आसपास आवारा कुत्ते दिखने पर नगर निगम, नगर पालिका या पंचायत को लिखित सूचना दें। निकाय केवल बंध्याकरण कर कुत्तों को शेल्टर होम भेजेगी। काटने की स्थिति में उपचार भी सुनिश्चित किया जाएगा। जिला स्तर पर बीईओ, बीएसए कार्यान्वयन की समीक्षा कर दो सप्ताह में उच्च स्तर पर रिपोर्ट भेजेंगे। हालांकि जिले के करीब 1438 परिषदीय स्कूलों में से किसी में भी समिति का गठन नहीं हो सका है।
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वर्जन
सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि जल्दी से जल्दी समिति गठित कर इसकी रिपोर्ट भेजी जाएं।
- जयकरन यादव, जिला विद्यालय निरीक्षक
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