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पारा लुढ़कने से तारकोल ठिठुरा, सड़क निर्माण पर आफत

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नागल क्षेत्र में लाखनौर-सीड़की मार्ग पर एक हिस्से की बनी हुई सड़क। तापमान मे गिरावट की वजह से दूस? - फोटो : SAHARANPUR
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पारा लुढ़कने से तारकोल ठिठुरा, सड़क निर्माण पर आफत
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सहारनपुर। जिले का पारा लुढ़ने से आम जनजीवन के साथ सड़कों के निर्माण को भी ठंड लगने लगी है। इसके चलते करीब दर्जनभर तारकोल से बनने वाली सड़कों का निर्माण कार्य बंद हैं। दरअसल, तारकोल से बनने वाली सड़क के लिए न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर दिक्कत आती है। सही तरह से तारकोल की पकड़ नहीं बनने के कारण सड़क जल्द उखड़ने लगती है।
लोक निर्माण विभाग की ओर से जिले में एक दर्जन से ज्यादा सड़कों का निर्माण कार्य कराया जाना है। जिनका निर्माण नवंबर में शुरू हुए उन्हें दिसंबर में सर्दी भारी पड़ गई है। नवंबर के अंतिम सप्ताह के बाद से ही न्यूनतम तापमान लगातार गिर रहा है। इस समय पारा 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे तारकोल से बनने वाली सड़कों का निर्माण अटक गया है।
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- इन सड़कों का निर्माण रह गया अधूरा
- लाखनौर-सिडकी मार्ग
इस मार्ग पर करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा रही है। तापमान गिरने से पहले ही करीब डेढ़ किलोमीटर की सड़क बन गई है। लेकिन अब इसका निर्माण कार्य रुक गया। यह मार्ग सहारनपुर से मुजफ्फरनगर और नागल की तरफ जाने वालों के लिए संपर्क मार्ग है। यह सहारनपुर - मुजफ्फरनगर हाइवे को जोड़ता है।
- सांपला गोपाली मार्ग
देवबंद क्षेत्र के इस मार्ग पर करीब 7 किलोमीटर की सड़क बननी है। इस मार्ग पर पड़ने वाले एक दर्जन से ज्यादा गांवों के लिए यह महत्वपूर्ण मार्ग है। इसका निर्माण आधा हो पाया है।
- राजीपुर-जहीरपुर मार्ग
देवबंद क्षेत्र में ही इस मार्ग पर करीब 8 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जानी है। तापमान में गिरावट होने की वजह से इसका भी निर्माण आधा हो पाया है।
- 9 कार्यों की टेंडर प्रक्रिया रुकी
लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता ताराचंद रवि ने बताया कि तापमान में गिरावट के कारण उनके खंड में 9 सड़कों के निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया फिलहाल रोकी हुई है। पूर्व में जिनके टेंडर किए जा चुके हैं, उनमें कई निर्माण अभी अधूरे हैं।
सालों से कच्चा पड़ा रास्ता, दिक्कत उठा रहे लोग
देवबंद। गांव राजीपुर में जोहड़ के पास होकर मुख्य सड़क पर जाने वाला रास्ता सालों से कच्चा है, जिस वजह से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। राजीपुर निवासी मुस्तकीम, राजेश, नंद किशोर, अनीस, सुनील मोहन शीशपाल, राजेश कल्लू, हसीन का कहना है कि यह मार्ग वर्षों से कच्चा है। कई बार सड़क बनाए जाने की मांग कर चुके हैं। रात में और बरसात के दिनों में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में उन्होंने प्रधान पद का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नजम हाशमी को पत्र भी सौंपा।
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- वर्जन
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार का कहना है कि तारकोल और बजरी की सड़क बनाने के लिए न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से अधिक होना चाहिए। वैसे तो तारकोल को 150 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाता है लेकिन सर्दी के मौसम में तारकोल जल्दी सख्त हो जाता है। जिससे बजरी पर अपेक्षित पकड़ नहीं बना पाता है। इस कारण निर्माण के बाद वाहन चलने से सड़क उखड़ने लगती है।
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