आखिरकार पांच दिन भटकने के बाद बीएसएफ जवान अजय कुमार की मथुरा में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात हो गई। हालांकि वहां बेहद व्यस्त कार्यक्रम के चलते सीएम उसकी पूरी बात नहीं सुन पाए । उन्होंने उसे लखनऊ में मिलने और मदद करने का आश्वासन दिया है। मुलाकात होने के बाद बीएसएफ जवान को एक बार फिर से न्याय की आस बंधी है।
बांग्लादेश सीमा पर तैनात क्षेत्र के गांव ताताहेडी निवासी बीएसएफ जवान अजय कुमार परिजनों के उत्पीड़न के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पिछले चार दिन से लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रयास कर रहा है।
वहां मुलाकात न होने अजय कुमार जय हिंद सेवा संस्थान के पदाधिकारियों उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार, सचिव मनवीर माथुर, कोषाध्यक्ष रविंद्रपाल यादव, धर्मेंद्र यादव, रमाकांत और नरेंद्र यादव के साथ शनिवार को मथुरा पहुंचा।
वहां बेहद व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जवान से बात की। हालांकि वह उसकी पूरी बात नहीं सुन पाए परंतु उन्होंने जवान को हर संभव मदद का आश्वासन देते हुए लखनऊ में मिलने की बात कही है। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर भी मौजूद रहे। इसके बाद अब बीएसएफ जवान की मदद के लिए आगे आई संस्था लखनऊ में मीडिया के सामने भी पक्ष रखेगी।
यह है मामला
बीएसएफ जवान अजय कुमार के परिजनों के खिलाफ राजस्व लेखपाल द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जा करने एवं उक्त जमीन को कब्जामुक्त कराने के दौरान उसके गले में रस्सी डालकर जान से मारने के प्रयास सहित अनेक संगीन आरोपों में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
इसके बाद पुलिस ने अजय के पिता सरदारा और भाई प्रमोद को जेल भेज दिया था। पुलिस द्वारा अन्य नामजद लोगों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी गई। आरोप है कि घर का सामान तक तोड़ डाला गया। पुलिस के खौफ से महिलाओं एवं बच्चों ने गांव छोड़ दिया था।
इसके चलते तीन बच्चों की परीक्षाएं भी छूट गईं। जवान अजय के नवजात पुत्र की पैदा होने के बाद मौत हो गई इसके लिए भी पुलिस एवं राजस्व विभाग के उत्पीड़न को जिम्मेदार ठहराया गया।
मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई और पुलिस ने आठों आरोपियों पर से धारा 307 हटाने के साथ ही पांच महिलाओं सहित 6 आरोपियों के नाम निकालकर उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। जवान इसे आधा न्याय बताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है।