सहारनपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए प्रशासन को पूरे जनपद में जमीन नहीं मिल सकी है। इससे केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान स्वच्छ भारत मिशन को तगड़ा झटका लगा है।
डीएम ने भी मिशन के निदेशक को पत्र लिखकर जमीन न मिलने की जानकारी दे दी है। इसके बाद कचरा निस्तारण की उम्मीद भी खत्म हो गई है। ऐसे हालात में नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों से प्रतिदिन निकलने वाला हजारों मीट्रिक टन कचरा जनता के लिए और बड़ी मुसीबत बनता नजर आ रहा है।
नगर निगम क्षेत्र से निकलने वाले कचरे के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जमीन तलाशने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स 2016 की गाइडलाइन के तहत कचरे के वैज्ञानिक विधि से निस्तारण करने के आदेश सहारनपुर के लिए जारी किए थे।
उन्होंने नगर निगम क्षेत्र के साथ ही जनपद की सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों से निकलने वाले कचरे के एक साथ निस्तारण के लिए 18 हेक्टेयर यानी करीब 270 बीघा तथा कचरा डंप करने को 20 वर्ष के लिए 46 हेक्टेयर (690 बीघा) और 30 साल के लिए 69 हेक्टेयर (1035 बीघा) जमीन तलाश करने को कहा था।
डीएम एनपी सिंह ने 15 मई को सभी एसडीएम के साथ बैठक कर जमीन तलाश करने के निर्देश दिए थे। पूरा जनपद छानने के बाद किसी भी अधिकारियों को जमीन नहीं मिल सकी है। ऐसे में यानी कचरा निस्तारण के लिए जगी उम्मीद फिर से टूट गई है। जिला प्रशासन ने भी निदेशक को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत करा दिया है।
शहर से प्रतिदिन 272 मिट्रिक टन से अधिक कचरा निकलता है, जिसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नगर निगम के पास नहीं है। यह कचरा कमेला क्षेत्र में फेंका जा रहा है।
कुछ एनजीओ मिलकर डोर टू डोर जाकर कचरा इकट्ठा कर उसका इस्तेमाल खाद बनाने में करते हैं। इसके लिए वह घरों से शुल्क भी वसूलते हैं। मगर उनके द्वारा प्रतिदिन उठाया जा रहा कचरा मात्र 15 मिट्रिक टन ही है, जो पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा जनपद में कुल दस नगर पालिका और नगर पंचायत हैं, जहां से करीब 900 मिट्रिक टन कचरा प्रतिदिन निकलता है।