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बेटियों के प्रति सोच बदलें, कन्या भ्रूण हत्या अपराध : पांडेय

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सहारनपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव/सिविल जज (सीनियर डिवीजन) हृषीकेश पांडेय ने कहा कि महिलाओं को यह तय करना होगा कि कन्या भ्रूण हत्या में सहभागी न बनें। वह अपनी सोच बदलें ताकि लिंगानुपात 1000-898 बालिका से बढ़कर पुरुषों के बराबर हो जाए। हर बालिका को जन्म लेने का मौलिक अधिकार है। उसे जन्म से पूर्व गर्भ में ही न मारें। वह बुधवार को न्यू भगत सिंह कॉलोनी में आयोजित विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर को संबोधित कर रहे थे।
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पांडेय ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य कमजोर तबके, जरूरतमदों, महिलाओं तथा बच्चों को नि:शुल्क विधिक सहायता प्रदान करना तथा उनको मौलिक अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक कर सशक्त बनाना है। शिविर का मकसद कानून की जानकारी को समाज की हर नारी तक पहुंचाना ताकि उनकी सुरक्षा व विकास हो सके। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों और महिलाओं के उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाओं की भी जानकारी दी। कन्या भ्रूण हत्या के बारे में विस्तार से बताया कि लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम 1994 के तहत प्रसव पूर्व लिंग की जांच करवाना कानूनन अपराध है। भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 312 यह कहती है कि जो भी व्यक्ति जानबूझकर किसी महिला का गर्भपात कराता है उसे सात साल की कैद की सजा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुकदमा लड़ने में किसी महिला को नि:शुल्क वकील की आवश्यकता हो तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में आवेदन भेज सकती हैं या स्वयं भी मिल सकती हैं। कार्यक्रम में कोरोना से बचाव की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में कुंतीपाल, चंदा पोदार्थ, विदुषी अग्रवाल, स्वर्ण सहूला, पायल, निभा बख्शी, नीरज, राजकुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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