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अनलॉक-दो में बदले रोस्टर का नियम

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शूज व्यापारी गुलशन कत्याल - फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। अनलॉक एक खत्म हो गया और बुधवार से अनलॉक - दो शुरू हो गया है। अनलॉक-दो में रियायतों को लेकर व्यापारी और कारोबारियों का स्पष्ट कहना है कि रोस्टर का फार्मूला बदला जाए। दाएं-बाएं के चक्कर में तीन दिन की बजाय सप्ताह में लगातार पांच दिन दोनों ओर दुकानें खोलने का अवसर दिया जाए। बाकी दो दिन पूरी तरह बंद कर दिया जाए। व्यापारी और कारोबारियों से बातचीत पर पेश है रिपोर्ट...
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दोनों ओर दुकानें खोलना जरूरी : गुलशन
- कोर्ट रोड के प्रमुख शूज कारोबारी गुलशन कत्याल कहते हैं कि रियायतें मिलने और शादियों का सीजन होने के बावजूद कारोबार इसलिए आगे नहीं बढ़ पाया क्योंकि दाएं-बाएं के नियम के कारण तीन दिन ही प्रतिष्ठान खोलने का मौका मिला। यहां करीब 100 फुट चौड़ी सड़क है। बीच में डिवाइडर है। ऐसे में दोनों ओर दुकानें खोलने का अवसर दिया जाए। तभी कारोबार बढ़ सकेगा।
समय कम कर दो, मगर लगातार व्यापार हो
- डेकोरेटेड आइटम्स के प्रमुख कारोबारी मधुप अरोड़ा कहते हैं कि पहले शादियों के सीजन में फूल, गुलदस्ते, गिफ्ट्स, वॉच सहित अन्य आइटम्स काफी बिकते थे। अनलॉक-एक में आयोजनों में बंदिशों और रोस्टर की दिक्कतों के कारण कारोबार बेहद कमजोर रहा। अनलॉक दो में समय भले ही कम कर दो मगर सभी दुकानदारों के लिए पांच से छह दिन का लगातार कारोबार करने का मौका दिया जाए।
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न तो उतने दूल्हे आए और न ही बरात के लोग
- वेडिंग ड्रेस और आइटम्स के कारोबारी गिरीश कहते हैं कि इन दिनों अनलॉक वन शादियों के सीजन वाला था। उनके कारोबार का यही सबसे महत्वपूर्ण समय था। दूल्हे, उसके परिवार के लोगों से लेकर बरात से जुड़े लोग वेडिंग ड्रेस के लिए आते थे। हर समय भीड़ रहती थी। मगर अब न तो उतने दूल्हे आए और न ही बरात के लोग। महज 10 से 15 फीसदी कारोबार ही हुआ। इसलिए अनलॉक दो में और ढील दी जाए।
अनलॉक-एक मेें राहत कम, विवाद ज्यादा मिले
- अनलॉक एक में वैसे तो काफी रियायतों का दावा किया गया, लेकिन रोस्टर सिस्टम ने बाधाएं बढ़ा दीं। व्यापारियों को राहत तो कम मिली, उलटे विवाद और हंगामे काफी हो गए। दाएं और बाएं सिस्टम के कारण व्यापारी अब तक आपस में ही उलझ रहे हैं। फिर कारोबार आगे बढ़े तो कैसे। इसलिए पांच दिन लगातार दुकान खोलने का सिस्टम बनाया जाए। तभी झगड़े रुकेंगे और कारोबार आगे बढ़ेगा।
अनलॉक-एक में कितना पड़ा असर
- शादियों के सीजन में शेरवानी, शूट, कोट, टाई सहित अन्य सामान की बिक्री से पहले रोजाना दो से तीन लाख रुपये का कारोबार होता था। अनलॉक एक में यह 10 से 20 फीसदी तक सिमट गया।
- अनलॉक एक में जूते, चप्पल, स्लीपर आदि का कारोबार 20 से 50 फीसदी तक ही रहा। शादियों के आयोजनों पर बंदिशों का असर भी सामने आया।
-- शादियों के बाद आगे के त्योहारों के लिए पहले जून से सितंबर माह तक तीन से पांच करोड़ तक के कपड़े बिक जाते थे। इस बार यह भी सिमटकर 20 फीसदी तक ही रह गया है।
-- इन्हीं महीनों में डेकोरेटेड आइटम्स, फूलों के गुलदस्ते आदि की बिक्री खूब होती थी। पहले एक महीने में दो से तीन लाख रुपये का कारोबार होता था, अब यह सिमटकर 22 फीसदी तक का रह गया है।

कारोबारी मधुप अरोड़ा- फोटो : SAHARANPUR

गिरीश कुमार- फोटो : SAHARANPUR

हरीश बजाज- फोटो : SAHARANPUR

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