सहारनपुर के देवबंद में विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मुफ्तियों ने एक सवाल के जवाब में दिए फतवे में कहा कि कब्रिस्तानों को खेल का स्थान बनाकर वहां कबड्डी, कुश्ती या दूसरे अनैतिक कार्य करना नाजायज है।
सांपला खत्री गांव निवासी मोहम्मद सादिक ने दारुल उलूम के मुफ्तियों से सवाल किया था कि कब्रिस्तान में कबड्डी और कुश्ती के अखाडे़ बनाकर कुछ लोग कब्रों की बेइज्जती कर रहे हैं।
शोर शराबा करने के साथ ही वहां पर बीड़ी, सिगरेट पीते हैं और मोबाइल पर गाने सुनते हैं क्या यह ठीक है? सोमवार को दारुल इफ्ता विभाग के मुफ्ती-ए-आजम मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मुफ्ती वकार अली ने सवाल के जवाब में कहा कि कब्रिस्तान को खेल का स्थान बनाकर वहां कबड्डी और कुश्ती जैसे खेल कराना, बीड़ी सिगेरट पीना, शोर मचाना, मोबाइल पर गाने सुनना और कब्रों पर मोटर साइकिलें चलाने से बचना चाहिए। जो लोग इस प्रकार का कार्य करते हैं वह अल्लाह के नजदीक गुनाहगार हैं।
मुफ्तियों ने फतवे में यह भी कहा कि गांव के जिम्मेदार लोगों को चाहिए कि वह इस प्रकार का कार्य करने वाले अराजक तत्वों के वहां आने जाने पर पाबंदी लगाएं और कब्रिस्तान की चारदीवारी कराकर कब्रों की बेहुरमति (बेइज्जती) होने से बचाएं।