सहारनपुर। जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने कहा है कि जिले में अवैध खनन के अन्य संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही खनिज भंडारण की निकासी और परिवहन को सीसीटीवी कैमरे में कैद करने के प्रयास किए जाएंगे। खनन से लदे प्रत्येक वाहन का फोटो कराने के भी निर्देश दिए गए।
कलक्ट्रेट सभागार में इस मामले को लेकर हुई बैठक में स्वीकृत खनन पट्टों एवं स्टोन क्रेशरों का ब्योरा लेते हुए आगे की प्लानिंग पर मंथन किया गया। इस दौरान बताया गया कि जिले में यमुना नदी तल में वर्तमान में चार खनन पट्टा एवं 13 खनन अनुज्ञा पत्र संचालित है। इसमें सात अनुज्ञा पत्र साधारण बालू के है। शेष छह अनुज्ञा पत्र बालू, बजरी व बोल्डर (मिश्रित अवस्था) के है। तहसील बेहट में स्थित 39 स्टोन क्रशर के लाइसेंस हैं।
जनपद में निर्माण सामग्री उप खनिज (बालू, बजरी, गिट्टी) की आपूर्ति हो रही है। अवैध खनन में पूर्व पट्टा धारकों एवं स्टोन क्रेशरों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। इसमें 294 करोड़ की वसूली प्रमाणपत्र भी निर्गत किए गए हैं। चार पूर्व पट्टाधारकों महमूद अली, मोहम्मद इनाम, वाजिद अली और विकास अग्रवाल का नाम उत्तर प्रदेश शासन द्वारा एक जून 2018 को 02 वर्ष के लिए काली सूची में डाला गया है।
अवैध खनन के परिवहन पर भी लगाएंगे लगाम
- डीएम ने कहा कि अवैैध खनन के परिवहन और ओवरलोडिंग पर भी लगाम लगाई जाएगी। जिले में अवैध खनन परिवहन में वर्ष 2019-20 में 685 मामले पकड़े गए है। इसमें 226.35 लाख की शमन राशि प्राप्ति हुई है। वर्ष 2020-21 में माह मई 2020 तक 47 मामले पकड़े गए हैं और 11.50 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। वित्तीय वर्ष 2020-21 में वार्षिक लक्ष्य 65 करोड़ के सापेक्ष 18.50 करोड़ प्राप्त हुआ है। यह अब तक 28.46 प्रतिशत रहा है।