सहारनपुर। एसबीडी जिला अस्पताल में बर्न यूनिट और उसके लिए चिकित्सकों व स्टाफ के पद सृजित करने के शासन के आदेश को लेकर चिकित्सा अधिकारी भी हैरान हैं। दरअसल, जिला अस्पताल में बर्न यूनिट है ही नहीं। इसके बावजूद शासन ने चिकित्सकों और स्टाफ के कुल 22 पद सर्जित किए हैं।
शासन द्वारा जारी आदेश में सहारनपुर के साथ ही प्रदेश के 28 जनपद भी शामिल हैं। सहारनपुर के एसबीडी जिला अस्पताल की बर्न यूनिट के लिए प्लास्टिक सर्जन का एक, सर्जन के दो, ईएमओ (इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर) के तीन, स्टाफ नर्स के छह, फिजियोथैरेपिस्ट का एक, ड्रेसर के तीन और कर्मचारियों के छह पर सृजित किए गए हैं, जबकि यहां बर्न यूनिट है ही नहीं। एसबीडी जिला अस्पताल में 16 बेड का बर्न वार्ड जरूर हैं, जो अस्पताल की स्थापना के दौरान से काम कर रहा है। यहां सामान्य फिजीशियन ही जले हुए मरीजों का इलाज करते हैं। इसके अलावा वार्ड ब्वॉय और नर्स यहां 24 घंटे तैनात रहती हैं। शुक्रवार को भी यहां तीन मरीज भर्ती थे।
गंभीर रोगी होते हैं रेफर
एसबीडी जिला अस्पताल में केवल बर्न वार्ड है, जहां सामान्य फिजीशियन जले हुए मरीजों का इलाज करते हैं। दवाएं भी पर्याप्त मात्रा में रहती हैं, लेकिन प्लास्टिक सर्जन, सर्जन, ईएमओ आदि नहीं होने की वजह से गंभीर रूप से जले मरीजों को हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। ज्यादातर लोग अपने मरीजों को देहरादून या चंडीगढ़ लेकर जाते हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं है। फिर भी शासन की ओर से चिकित्सकों के पद सृजित कर दिए गए। जिला अस्पताल में बर्न वार्ड जरूर है, जो शुरू से ही है। यहां हमारे फिजीशियन, नर्स, और स्टाफ मरीजों का इलाज करता है। प्रयास यही रहता है कि मरीज को बेहतर इलाज दिया जा सके।
डॉ. रमेश चंद्र, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।