अलाव जलाएं, मगर प्रदूषण न फैलाएं
सहारनपुर। सर्द मौसम में ठंड से बचाव के लिए अगर अलाव जला रहे हैं, तो थोड़ा सावधान भी रहना होगा। अलाव के दौरान यदि प्रदूषित धुआं उठा तो कार्रवाई हो सकती है। शहर के सार्वजनिक स्थलों से लेकर सरकारी कार्यालयों और घरों से प्रतिष्ठानों तक में लोग अलाव जला रहे हैं। जिला प्रशासन से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक की ओर से चेताया जा रहा है कि अलाव जलाएं, मगर प्रदूूषण न फैलाएं। पत्ती या अन्य फसलों के अवशेेष से अलाव न जलाने की खास हिदायत दी गई है।
अलाव जलाने के लिए नहीं होगा इनका प्रयोग
- फसल अवशेष से अधिक धुएं वाला अलाव
- प्लास्टिक के सामान या पॉलिथीन
- रबड़ के टायर का प्रयोग
- बहुत ज्यादा और ऊंचाई तक धुएं वाला अलाव
- केरोसिन, केमिकल जैसे पदार्थ
- अलाव में गीली लकड़ी
खेतों में ठंड से बचाव को क्या करे किसान : नीरज
भारतीय किसान यूनियन (अंबावत) के जिला अध्यक्ष नीरज चौधरी का कहना है कि खेतों में काम करने के बाद ठंड से बचाव के लिए किसान पत्ती से कुछ देर के लिए अलाव जलाता है। इसमें इतना प्रदूषण नहीं होता, लेकिन किसानों पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में किसान ठंड से बचाव के लिए क्या करें। किसान नेता बिट्टू नंबरदार ने किसानों पर अलाव जलाने पर मुकदमे दर्ज करने का विरोध जताया है।
- सर्द मौसम में ठंड से बचाव के लिए अलाव जलाना पड़ता है। इससे मनाही नहीं है। मगर अलाव के लिए ऐसी सामग्री का प्रयोग नहीं होना चाहिए, जिससे प्रदूषण फैलता हो। इसलिए एहतियात बरतने के लिए कहा गया है।
- एसआर मौर्य, क्षेत्रीय अधिकारी, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड